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NSG में भारत की दावेदारी में चीन का अडंगा जारी

 

460443-pakistan-india-china-collageनई दिल्ली. न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत की मेंबरशिप को लेकर देररात तक चली मीटिंग के बाद 48 में से 47 देश भारत के समर्थन में आ गए। जबकि चीन अब तक समर्थन न देने की बात पर अड़ा हुआ है। इसके पहले पीएम नरेन्द्र मोदी ने भी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से विशेष मुलाक़ात कर समर्थन मांगा है। मोदी ने जिनपिंग से कहा कि भारत के एप्लीकेशन पर चीन निष्पक्ष रवैया अपनाकर समर्थन करें। अब अगली मीटिंग शुक्रवार (आज) होगी। समर्थन देने चीन समेत अड़ गए थे पांच देश…

– सिओल में गुरुवार को मीटिंग के दौरान भारत की दावेदारी का चीन समेत पांच देशों- न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रिया, तुर्की और आयरलैंड ने विरोध कर दिया था।

– इन देशों ने कहा कि एनटीपी पर साइन किए बिना भारत को इस ग्रुप में शामिल नहीं किया जा सकता।

– बता दें कि इस मुद्दे पर पैरवी के लिए फॉरेन सेक्रेटरी एस. जयशंकर सिओल में हैं।

– चीन की शर्त है कि भारत NSG में शामिल हो तो पाकिस्तान को भी इसमें शामिल किया जाए।
– तुर्की का कहना है कि भारत और पाक को एक साथ मेंबरशिप दी जाए।

– एनएसजी की प्लेनरी मीटिंग शुक्रवार को भी होगी।

जिनपिंग से मोदी की मुलाकात का नहीं दिखा असर

– इससे पहले, ताशकंद में गुरुवार को नरेंद्र मोदी की चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग से मुलाकात हुई।

– दोनों यहां हिस्सा तो शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) में लेने पहुंचे हैं लेकिन एनएसजी में भारत की मेंबरशिप का मुद्दा ही चर्चा में रहा।

– विदेश मंत्रालय के स्पोक्सपर्सन विकास स्वरूप ने कहा, ”पीएम ने चीनी प्रेसिडेंट से मुलाकात के दौरान एनएसजी मेंबरशिप का मुद्दा उठाया। कहा कि इंडिया की मेरिट को आंके और फिर फैसला किया जाए।”

पाक ने कहा- अकेले भारत को मेंबरशिप मिली तो बिगड़ेगा पावर बैलेंस

– SCO से अलग पाकिस्तान के प्रेसिडेंट ममनून हुसैन ने ताशकंद में शी जिनपिंग से मुलाकात की।

– दोनों लीडर्स ने एनएसजी में मेंबरशिप और चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर को लेकर बातचीत की।
– दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि एनएसजी मेंबरशिप में भेदभाव नहीं होना चाहिए।
– दोनों का मानना है कि अगर अकेले भारत को मेंबरशिप मिलती है तो क्षेत्र में शक्ति संतुलन बिगड़ेगा।
– पाकिस्तान ने चीन को NSG मेंबरशिप के लिए सपोर्ट करने पर शुक्रिया भी किया।

– मोदी ने उज्बेकिस्तान के प्रेसिडेंट इस्लोम करीमोव के साथ भी मुलाकात की।

– शुक्रवार को मोदी की रशियन प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन से बातचीत होगी।

भारत बोला- पॉजिटिव रवैया रखें

– भारत ने एनएसजी मेंबर्स से अपील की है कि वे उसकी एंट्री को लेकर पॉजिटिव रवैया रखें।
– फ्रांस की फॉरेन मिनिस्ट्री ने बुधवार को जारी स्टेटमेंट में कहा, “हम भारत की चारों ग्रुप (एनएसजी, MTCR, ऑस्ट्रेलिया ग्रुप और वैसेनार अरेंजमेंट) में एंट्री के लिए सपोर्ट करेंगे। न्यूक्लियर प्रोलिफिरेशन (परमाणु अप्रसार) के लिए ये जरूरी होगा।”
जयशंकर के साथ ये अफसर भी होंगे बातचीत में शामिल

– सिओल में फॉरेन सेक्रेटरी जयशंकर के साथ अमनदीप गिल (ज्वाइंट सेक्रेटरी, डिसआर्मामेंट एंड इंटरनेशनल सिक्युरिटी) और साउथ कोरिया में भारत के एम्बेसडर विक्रम दुरईस्वामी एनएसजी की मीटिंग में शामिल होंगे।
– गिल लगातार परमाणु मुद्दे पर बातचीत में शामिल रहे हैं, वहीं दुरईस्वामी को यूएस-चीन के साथ बातचीत का लंबा एक्सपीरियंस है।

भारत को अमेरिका से उम्मीद

– चीन नॉन-प्रोलिफिरेशन ट्रीटी (परमाणु अप्रसार संधि-NPT) को लेकर लगातार भारत की एनएसजी में एंट्री का विरोध कर रहा है।
– ऐसे में, मीटिंग में भारत को अमेरिका से सपोर्ट की खासी उम्मीद है।
– मोदी के यूएस दौरे में भी बराक ओबामा ने भारत को सपोर्ट करने की बात कही थी।
– चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री की स्पोक्सपर्सन हुआ चुनयिंग के मुताबिक, “एनएसजी मेंबर्स के बीच नॉन-एनपीटी देशों की एंट्री को लेकर अलग-अलग राय है। इसे लेकर हमें चर्चा करनी होगी।”
– इससे पहले चीन, पाकिस्तान को भी एनएसजी मेंबरशिप मिलने की वकालत कर चुका है।

ये देश NSG में भारत के सपोर्ट में
– अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, बेलारूस, बेल्जियम, ब्राजील, बुल्गारिया, कनाडा, क्रोएशिया, सायप्रस, चेक रिपब्लिक, डेनमार्क, एस्तोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस और हंगरी।
– इटली, जापान, कजाखस्तान, आइसलैंड, रिपब्लिक ऑफ कोरिया, लात्विया, लिथुआनिया, लग्जमबर्ग, माल्टा, मेक्सिको, नीदरलैंड्स, नॉर्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, रशियन फेडरेशन, सर्बिया, स्लोवाकिया, स्पेन, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, यूक्रेन, यूके, फ्रांस और यूएस।

भारत के सपोर्ट में ये तर्क
– अमेरिका समेत सभी समर्थक देशों का मानना है कि भारत को डेवलपमेंट के लिए एटॉमिक एनर्जी की जरूरत है।
– भारत लंबे समय से एक जिम्मेदार देश के रूप में पेश आया है। ऐसे में, उसे NSG में शामिल किया जाना चाहिए।

क्या है SCO?

– एससीओ की स्थापना 2001 में हुई थी। उस वक्त इसमें चीन, कजाखिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल थे।
– ये पहली बार है जब एससीओ में नए मेंबर्स को इनवाइट किया गया है। इसमें भारत और पाकिस्तान को मेंबर बनाया गया है, जबकि अफगानिस्तान, ईरान और मंगोलिया ऑब्जर्वर का दर्जा दिया गया है।
– भारत-पाकिस्तान को पिछले साल जुलाई में ही एससीओ में मेंबरशिप को मंजूरी दे दी गई थी।
– एससीओ की मेंबरशिप मिलने के बाद भारत को एनर्जी सेक्टर में काफी सपोर्ट मिलेगा।

 

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