
नवाज शरीफ बीते साल जब लंदन से पाकिस्तान लौटे थे तो कहा गया था कि वो प्रधानमंत्री बनने के लिए ही लौटे हैं। एक के बाद उन पर चल रहे मुकदमे खत्म हुए और सेना का समर्थन भी मिला। इस सबके बावजूद चुनाव में उनकी पार्टी बहुमत नहीं पा सकी। बहुमत से दूर रहने के बावजूद नवाज शरीफ की पीएमएलएन सरकार बनाने जा रही है लेकिन पीएम वह खुद नहीं बन रहे हैं। उन्होंने अपने भाई शहबाज शरीफ को पीएम बनाने का फैसला लिया है। शहबाज ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि वह नवाज शरीफ को पीएम देखना चाहते हैं लेकिन नवाज ने पद ना लेने का फैसला किया। उनके इस फैसले की दो बड़ी वजह मानी जी रही हैं।
नवाज शरीफ के पीएम ना बनने की सबसे अहम वजह उनकी पार्टी का बहुमत से दूर रह जाना है। चुनाव नतीजों के बाद उन्होंने कहा भी कि वह बहुमत की उम्मीद कर रहे थे। दूसरी ओर गठबंधन सरकार ना चलाने की इच्छा वह नतीजों से पहले ही जाहिर कर चुके थे। चुनाव के दिन अपना वोट डालने के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा था कि केवल एक बहुमत वाली सरकार ही कड़े फैसले और किए गए वादों को पूरा प्रदर्शन की जिम्मेदारी लेते हुए देश को मौजूदा संकट से निकाल सकती है। ऐसे में जब उनको बहुमत नहीं मिला तो उन्होंने पीएम पद से दूर रहने का फैसला लिया। पीएमएलएन के वरिष्ठ नेता राना सनाउल्लाह का कहना है कि उनकी पार्टी नवाज शरीफ को चौथी बार पीएम देखना चाहती थी लेकिन हम खुद से सरकार बनाने लायक संख्या हासिल नहीं कर पाए तो उन्होंने कदम खींच लिए।
शहबाज को माना जाता है गठबंधन में मास्टर – राना सनाउल्लाह का कहना है कि हमने गठबंधन मास्टर शहबाज शरीफ को ही इस सरकार को चलाने के लिए आगे किया है। वह इमरान खान की सरकार गिरने के बाद 13 पार्टियों की गठबंधन सरकार को 16 महीने तक कामयाबी के साथ चला चुके हैं। उनके इस अनुभव को देखते हुए पार्टी के तमाम नेताओं में इस बात पर सहमति बनी की शहबाज शरीफ को पीएम बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि नवाज शरीफ और बाक़ी पार्टी मानती है कि शहबाज गठबंधन सरकार को ज्यादा प्रभावी तरीके से संभालेंगे। हालांकि पीएमएलएन ने नवाज शरीफ के राजनीति छोड़ने के कयासों को निराधार कहा है। पार्टी नेताओं ने कहा है कि वह भले पद नहीं ले रहे हैं लेकिन अगले पीएम और पंजाब के अगले सीएम को वह मदद करेंगे। सात ही वह समर्थकों को पार्टी से जोड़ने के लिए भी काम करेंगे।
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