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चीन के पड़ोस में पहुंचीं जापानी व‍िदेश मंत्री, नेपाल को ड्रैगन के खतरे से चेताया, भारत के दोस्‍त की बात मानेंगे प्रचंड?


जापान की व‍िदेश मंत्री कामिकावा योको रविवार को नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्‍प कमल दहल प्रचंड से मुलाकात के बाद अपने देश वापस लौट गई हैं। नेपाली व‍िदेश मंत्री ने यह यात्रा ऐसे समय पर की है जब एशिया में भूराजनीत‍िक हालात बहुत तेजी से बदल रहे हैं। पूर्वी जापान सागर से लेकर लद्दाख की सीमा तक चीनी सेना डराने धमकाने में लगी हुई है। यही नहीं चीन मालदीव से लेकर पाकिस्‍तान तक में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है। चीन की नजर अब नेपाल पर है जो भारत का करीबी पड़ोसी देश है। वहीं नेपाल में केपी ओली के समर्थन से प्रचंड सरकार के बनने के बाद से वहां भी चीन की पकड़ मजबूत होती दिख रही है। हाल ही में नेपाल सरकार ने नोटों पर व‍िवाद‍ित नक्‍शा छापने का फैसला किया था। इस नक्‍शे को ओली सरकार ने चीन के इशारे पर बनवाया था और इसमें भारत के इलाकों कालापानी, ल‍िंपियाधुरा और ल‍िपुलेख को नेपाल का बताया गया था।
जापानी व‍िदेश मंत्री ने नेपाल नेतृत्‍व को आश्‍वासन दिया कि वह नेपाल को हर तरह की मदद करता रहेगा। काठमांडू पोस्‍ट के मुताबिक जापानी व‍िदेश मंत्री ने नेपाली व‍िदेश मंत्री के साथ मुलाकात में क्षेत्रीय भूराजनीत‍िक हालात पर चर्चा की। जापान और चीन दोनों ही दक्षिण चीन सागर और हिंद प्रशांत समेत कई मामलों में एक-दूसरे के प्रत‍िद्वंदी हैं। जापान, अमेरिका, ऑस्‍ट्रेलिया, भारत क्‍वॉड के सदस्‍य हैं जिसे चीन की चुनौत‍ियों से निपटने के लिए बनाया गया है। नेपाली व‍िदेश मंत्री के साथ मुलाकात में जापानी व‍िदेश मंत्री ने चीन पर न‍िशाना साधा। काम‍िकावा योको ने कहा कि जापान न‍ियम आधारित अंतरराष्‍ट्रीय प्रणाली का समर्थक है।
जापान ने नेपाल को बताई चीन की दादागिरी – जापानी व‍िदेश मंत्री कामिकावा ने कहा, ‘हम शांत‍िपूर्ण एशिया के समर्थक हैं।’ बता दें कि नियम आधारित व्‍यवस्‍था शब्‍दालवी का इस्‍तेमाल पश्चिमी देश चीन के खिलाफ करते हैं जो दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा करता है। इस बैठक में शामिल एक सूत्र ने कहा कि इस बैठक में जापानी व‍िदेश मंत्री ने कुछ भू राजनीत‍िक मुद्दे उठाए ज‍िसका सामना जापान इन दिनों कर रहा है। इस दौरान उन्‍होंने किसी खास देश का नाम नहीं लिया लेकिन यह आसानी से समझ लिया गया कि उनका इशारा किसकी ओर था। नेपाल और जापान के बीच इस बातचीत में दक्षिण चीन सागर, समुद्री सुरक्षा, जहाजों की आवाजाही की स्‍वतंत्रता, नियम आधारित अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यवस्‍था पर बातचीत हुई।