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रूसी सेना में मौजूद भारतीयों की जल्द हो वापसी… जयशंकर-लावरोव की हुई मीटिंग, भारत ने दोस्त रूस से कही खरी-खरी


कजाकिस्तान में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को रूस के अपने समकक्ष सर्गेई लावरोव के समक्ष युद्ध क्षेत्र में रूसी सेना के लिए लड़ रहे भारतीय नागरिकों का मुद्दा उठाया और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया। इसके अलावा अन्य देशों के रक्षामंत्रियों से भी वह मिले।
भारत की ओर से कजाकिस्तान के एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर गए हैं। बुधवार को यहां उन्होंने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इसमें डॉ. जयशंकर ने रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों को लेकर चिंता जताई। विदेश मंत्री ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, ‘आज अस्ताना में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मिलकर अच्छा लगा। मैंने उन भारतीय नागरिकों पर अपनी चिंता व्यक्त की जो वर्तमान में युद्धक्षेत्र में है। उनकी सुरक्षित और शीघ्र वापसी पर जोर दिया।’
रिपोर्ट्स के मुताबिक लगभग 200 भारतीय रूसी सेना में सुरक्षा सहायक के तौर पर भर्ती किए गए थे। युद्ध क्षेत्र में कम से कम चार भारतीयों की मौत हो चुकी है। भारत ने रूसी सेना की ओर से अपने नागरिकों की भर्ती के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह भारत-रूस द्विपक्षीय संबंधों के अनुरूप नहीं है। विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे को सीधे रूस और भारत में मौजूद रूसी राजदूत के साथ संबोधित किया है। सभी भारतीयों की शीघ्र रिहाई का आग्रह किया है।
हाथरस कांड पर पुतिन ने जताई संवेदना – लगभग 30 भारतीयों ने स्वदेश वापसी में सहायता के लिए विदेश मंत्रालय और मॉस्को में स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क किया है। एससीओ शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे जयशंकर ने रूस, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, बेलारूस और कजाकिस्तान के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस बीच अस्ताना में मौजूद रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने हाथरस कांड पर भारतीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पीएम नरेंद्र मोदी को शोक संदेश भेजा। 8 जुलाई को पीएम मोदी के रूस जाने की उम्मीद है। यहां दोनों के बीच मीटिंग हो सकती है।