
जब किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु और केतु ग्रहों के बीच अन्य सभी ग्रह आ जाते हैं तो कालसर्प दोष का निर्माण होता है। कुंडली में कालसर्प योग के शुभ अौर अशुभ दोनों प्रकार के प्रभाव हो सकते हैं। कुंडली में कालसर्प योग के कारण शादी न होना, संतान में विलंब, विद्या में दिक्कत आना, दांपत्य जीवन में कड़वाहट, मानसिक अशांति, स्वास्थ्य हानि साथ ही धन आभाव जैसी समस्याएं आती हैं। कालसर्प के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए जानिए कुछ उपाय-
कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए भगवान शिव का पूजन व महामृत्युंजय का पाठ करवाना चाहिए।
किसी भी शुभ तिथि को सुबह उठकर स्नानादि कार्यों से निवृत होकर शिवालय में जाकर शिवलिंग पर तांबे का नाग-नागिन अर्पित करें।
नाग-नागिन का जोड़ा खरीद कर उसे नदी में बहा दें। इसके साथ ही इष्टदेव से कालसर्प के अशुभ प्रभावों से मुक्ति के लिए प्रार्थना करें।
प्रतिदिन शिवलिंग पर तांबे के लोटे में जल लेकर अर्पित करें। जल अर्पित करते समय ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। मंत्र जप की संख्या 108 होना शुभ होता है।
शुक्ल पक्ष के किसी भी सोमवार को सफेद वस्त्र लेकर उसके ऊपर काले तिल अौर चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा रखकर घर के मंदिर में रख दें। श्रावण मास में किसी भी दिन काल सर्प योग शांति का पूजा-पाठ करवाएं। उस दिन इन्हें पूजा स्थल पर रखें अौर बाद में बहते जल में प्रवाहित कर दें।
नाग पंचमी के दिन सापों को दूध पिलाएं।
गरीब को काला कंबल, काली उदड़ की दाल का दान करें। गरीबों की मदद करें उनका अनादर कदापि न करें।
हर शनिवार के दिन काले कुत्ते को रोटी खिलाएं। यदि काला कुत्ता न मिले तो दूसरे रंग के कुत्ते को भी खिला सकते हैं।
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