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बांग्लादेश में शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग पर बैन लगाएंगे मोहम्मद यूनुस! लोकतंत्र लाने का दावा हुआ हवा


बांग्लादेश में शेख हसीना को उग्र आंदोलन के जरिए हटाने के बाद अब उनकी पार्टी अवामी लीग को भी चुनावी राजनीति से हटाने की तैयारी हो गई है। लोकतंत्र बहाली का दम भरने वाले देश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने देश की सबसे बड़ी पार्टी को कुचलने का मन बना लिया है।
बांग्लादेश में लोकतंत्र बहाली का दम भरने वाली मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में गठित अंतरिम सरकार देश की सबसे बड़ी पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाने जा रही है। मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के कार्यालय ने कहा है कि अंतरिम सरकार अवामी लीग और समान विचारधारा वाली पार्टियों को राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने से रोकेगी। ये तब हो रहा है, जब मोहम्मद यूनुस बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनकी पार्टी अवामी लीग पर लोकतंत्र को कुचलने और विरोधियों को चुनावी राजनीति से रोकने का आरोप लगाते रहे हैं।
शेख हसीना के सहयोगियों को भी रोकेंगे – बांग्लादेश के मीडिया आउटलेट डेली स्टार के अनुसार, शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन के ‘मास्टरमाइंड’ और मुख्य सलाहकार के विशेष सहायक महफूज आलम ने कहा कि ‘जिन लोगों ने पिछले तीन चुनावों में भाग लिया था और अवैध रूप से संसद में आए थे, उन्होंने लोगों को धोखा दिया है। अंतरिम सरकार निश्चित रूप से उनकी राजनीतिक भागीदारी पर रोक लगाएगी।’
आलम ने आगे कहा, ‘आप देखेंगे कि ये अवरोध कैसे प्रभावी होंगे। इसका एक कानूनी पहलू है और इसका एक प्रशासनिक पहलू भी है। आप इसे जल्द देखेंगे। चुनाव प्रक्रिया शुरू होने पर ये बातें स्पष्ट हो जाएंगी।’ महफूज आलम ने 10 राजनीतिक दलों के साथ मुख्य सलाहकार की मुलाकात के बारे में जानकारी देते हुए ये बातें कहीं।
पार्टियों से चर्चा के बाद होगा फैसला – अवामी लीग और उसके सहयोगियों पर प्रतिबंध लगाने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श के बाद इस पर फैसला लिया जाएगा। आलम ने कहा, ‘सरकार एकतरफा निर्णय नहीं लेगी।’ मुख्य सलाहकार के साथ बातचीत में कुछ पार्टियों ने अवामी लीग और उसके सहयोगियों पर प्रतिबंध लगाने या कम से कम उन्हें अगले राष्ट्रीय चुनाव में भाग लेने से रोकने की मांग की।
हसीना के सहयोगियों को भी न्योता नहीं – मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस और राजनीतिक पार्टियों के साथ बातचीत में जातीय पार्टी और अवामी लीग के अन्य सहयोगियों को वार्ता में नहीं बुलाया गया था। महफूज ने कहा, सरकार ने अवामी लीग के सहयोगियों को आमंत्रित नहीं किया, क्योंकि उन पार्टियों ने अवैध चुनावों में मौन समर्थन दिया और भाग लिया। अंतरिम सरकार ने साफ कर दिया है कि ये दल फासीवाद के सहयोगी थे। बता दें कि कई सप्ताह तक चले उग्र आंदोलन के बाद अवामी लीग नेता शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और देश छोड़कर भारत भाग गई थीं।