
विदेश जाने वाले भारतीयों को नस्लवाद का सामना करना पड़ता है। एक अच्छे जीवन की चाह में भारत छोड़ने वाले लोग लगभग हर देश में नस्लवाद झेलते हैं। इसे लेकर एक भारतीय ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा किए। उसने न्यूजीलैंड में होने वाले भेदभाव के बारे में बताया।
अमेरिका दूसरे देशों में होने वाले भेदभाव के खिलाफ ज्ञान देता है। लेकिन अपने देश या सहयोगी के देश में होने वाले नस्लीय भेदभाव पर चुप रहता है। फाइव आई देशों में से एक न्यूजीलैंड से जुड़ा एक ऐसा ही मामला आया है। एक भारतीय व्यक्ति ने दो साल पहले न्यूजीलैंड में आने के बाद वहां अपने साथ हुए नस्लवाद के बारे में विस्तार से बताया है। उसने ऑनलाइन एक पोस्ट शेयर किया। उसने बताया कि उसे हद से ज्यादा नस्लवाद झेलना पड़ा। कई लोगों ने उसे वापस भारत लौट जाने को भी कहा।
रेडिट पर उसने एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा। इसमें उसने बताया, ‘मेरे मन में न्यूजीलैंड की स्वागत करने वाली और बहुसांस्कृतिक होने की एक आदर्श छवि थी। लेकिन मेरा अनुभव इससे बहुत दूर था।’ अपने पोस्ट में उसने बताया कि उसे यहां कई अच्छे लोग मिले, इसके बावजूद न्यूजीलैंड में उसका अनुभव नस्लवादी टिप्पणियों से भरा रहा।
उसने कहा, ‘मुझे उम्मीद से ज्यादा नस्लवाद का सामना करना पड़ा है। सड़क पर अनजान लोगों की ओर से मुझ पर चिल्लाने से लेकर मेरे वर्कप्लेस पर मेरे उच्चायरण या मौजूदगी के कारण असभ्य टिप्पणियां तक की गईं।’
‘जहां से आए हो वहीं लौट जाओ’ – उसने बताया कि जब वह लोगों से मेलजोल बढ़ाने की कोशिश करता तो उसे महसूस होता कि लोग उससे बच रहे हैं या अलग तरह से व्यवहार करते हैं। उसने कहा कि कभी-कभी लोग बातचीत से उसे अलग कर देते हैं। वहीं कई बार कहा जाता है कि जहां से आए हो वहीं चले जाओ।
उसने बताया कि स्थानीय संस्कृति से जुड़ने के लिए उसने बोलचाल की भाषा सीखने की कोशिश की। खुले दिमाग से उसने यह सोचने समझने का प्रयास किया कि न्यूजीलैंड में चीजें कैसे काम करती है। उसने कहा, ‘कभी-कभी यह सब सीखना थका देने वाला हो जाता है। मुझे भारत में बड़े होने पर कभी भी इस तरह का अहसास नहीं हुआ कि मैं एक बाहरी व्यक्ति हूं। लेकिन यहां दो साल बाद भी मुझे ऐसा लगता है कि मैं बाहरी हूं।’
लोगों ने बताए अपने अनुभव – उसने कहा, ‘यह कठिन है, क्योंकि मैं न्यूजीलैंड को अपना घर बनाना चाहता हूं। लेकिन ऐसे भी मौके आते हैं जब मुझे इस बात का आश्चर्य होता है कि क्या मैंने सही विकल्प चुना है?’ उन्होंने अन्य लोगों से पूछा कि क्या आपको भी इस तरह के नस्लवाद का सामना करना पड़ा है? उनके पोस्ट पर कई लोगों ने सकारात्मक प्रक्रिया दी और कहा कि वह इस पर ध्यान न दें। कई लोगों ने अपने साथ हुए नस्लवाद का जिक्र करते हुए बताया कि उन्हें नस्लवाद के कारण देश छोड़ना पड़ा।
एक अन्य यूजर ने कहा, ‘आप जहां भी जाएंगे आपको नस्लवाद का सामना करना पड़ेगा। मैं कनाडा में हूं और एक बिजनेस चलाता हूं। लोग अप्रवासियों पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं होता है।’
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