
बांग्लादेश में तख्तापलट के बाद शेख हसीना को सत्ता से हटाया गया। अवामी लीग ने आरोप लगाया कि उसके सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं को इस्लामी संगठनों ने निशाना बनाया। हसीना के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराधों की जांच जारी है। छात्र शिबिर पर हत्याओं का आरोप है, और हिंसा व राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी है।
बांग्लादेश में इस साल तख्तापलट हो गया है। शेख हसीना को गुस्साए छात्रों ने सत्ता से हटा दिया। शेख हसीना की राजनीतिक पार्टी अवामी लीग बांग्लादेश की सबसे पुरानी पार्टी है। पार्टी ने दावा किया है कि इस साल जुलाई से अब तक उसके लगभग 400 नेताओं और कार्यकर्ताओं को इस्लामी संगठनों और जमात-ए-इस्लामी कैडरों की ओर से मार दिया गया है। जानकार लोगों के मुताबिक ज्यादातर मामलों में अवामी सदस्यों को मौत के घाट उतार दिया गया। यह एक ट्रेडमार्क शैली है, जिसे जमात-ए-इस्लामी ने पूरे बांग्लादेश में विपक्ष पर हमले के लिए अपनाया।
जमात की छात्र शाखा छात्र शिबिर ऐसी हत्याओं के लिए जानी जाती है। अवामी लीग ने हाल ही में जुलाई से मारे गए अपने 394 पदाधिकारियों की सूची जारी की। मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक पार्टी ने कहा कि यह प्रारंभिक सूची है और आने वाले दिनों में और अधिक हत्याओं की जानकारी जारी की जाएगी। 5 अगस्त के बाद से जब शेख हसीना की अवामी लीग सरकार गिर गई, पार्टी के नेताओं, कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों को पूरे बांग्लादेश में व्यवस्थित रूप से निशाना बनाया गया।
अवामी लीग पर हमले जारी – बांग्लादेश में तख्तापलट के दौरान कई मामलों में कार्यकर्ताओं की संपत्तियां भी ध्वस्त की गईं। सितंबर और अक्टूबर के बीच पूरे बांग्लादेश में भीड़ की पिटाई और लिंचिंग आम थी। कथित तौर पर अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। अवामी छात्र शाखा छात्र लीग को एक आतंकी संगठन करार दिया गया है और इसके कई सदस्यों को जेल भेज दिया गया है।
बांग्लादेश के सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अवामी लीग को निशाना बनाकर हत्या का सिलसिला जारी है। शेख हसीना ने अपनी बहन के साथ 5 अगस्त को बांग्लादेश छोड़ दिया था। इसके एक दिन बाद पार्टी के 29 सदस्य और उनके परिवार के लोग मारे गए थे।
शेख हसीना के खिलाफ आरोपों की जांच की समयसीमा बढ़ी – बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध के आरोपों की जांच पूरी करने की समय सीमा मंगलवार को दो महीने के लिए बढ़ा दी। ‘डेली स्टार’ अखबार की खबर के अनुसार, न्यायाधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति गुलाम मुर्तुजा मजूमदार की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह आदेश पारित किया तथा जुलाई-अगस्त में छात्र नेतृत्व वाले प्रदर्शनों के दौरान नरसंहार के लिए हसीना और पूर्व मंत्रियों सहित 45 अन्य के खिलाफ दर्ज मामले में जांच पूरी करने के लिए समय सीमा 18 फरवरी तक बढ़ा दी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, दो मामलों की जांच रिपोर्ट आज पूरी होनी थी, लेकिन जांच एजेंसी ने और समय मांगा। पूर्व कृषि मंत्री अब्दुर रज्जाक को नरसंहार मामले में गिरफ्तार दिखाया गया, इसके अलावा 15 अन्य उच्च पदस्थ लोगों को भी इस मामले में पूर्व में गिरफ्तार दिखाया गया था।
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