
स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस का प्रोडक्शन भी इसलिए अकटा हुआ है क्योंकि अमेरिका ने अभी तक इंजन की सप्लाई नहीं की है। लिहाजा भारत के लिए अमेरिका पर विश्वास करना काफी मुश्किल है। भारत का AMCA फिफ्थ जेनरेशन लड़ाकू विमान के इंजन के लिए रूस को बातचीत में शामिल करना एक रणनीतिक फैसला है।
रूस को आजमाया हुआ दोस्त क्यों कहते हैं, वो आप हमारी इस रिपोर्ट को पढ़कर समझ जाएंगे। भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस एमके1 का प्रोडक्शन सिर्फ इसलिए नहीं हो रहा है, क्योंकि अमेरिका इंजन देने में लगातार बहाने बना रहा है। जबकि दोनों देशों के बीच कई साल पहले ही इंजन की खरीद के लिए सौदेबाजी हुई थी। ऐसे में अब भारत का विश्वास अमेरिका से टूट चुका है। भविष्य में भी अमेरिकी धोखेबाजी से बचने के लिए अब भारत ने बड़ा फैसला किया है। भारत ने दोस्त रूस को फाइटर जेट के इंजन के लिए बातचीत में शामिल करने की योजना बनाई है। दरअसल, भारत एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट बना रहा है और ऐसे लड़ाकू विमानों के लिए एक बेहतरीन इंजन का होना अत्यंत जरूरी है। और भारत ने बातचीत में हिस्सा बनने के लिए रूस के लिए दरवाजे खोल दिए हैं।
defence.in के मुताबिक रूस को बातचीत का हिस्सा बनाना भारत की रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है। भारत पहले सिर्फ पश्चिमी देशों की कंपनियां, जैसे जनरल इलेक्ट्रिक (अमेरिका), सफ्रान (फ्रांस) और रोल्स रॉयस (यूके) से बातचीत कर रहा था। लेकिन पश्चिमी देश बात बात पर मुंह फुला लेते हैं। ये अपने फायदे के लिए कभी भी धोखा दे सकते हैं। लिहाजा भारत ने अपने आजमाए हुए साथी रूस को बातचीत में शामिल कर लिया है, जो निश्चित तौर पर पश्चिमी देशों को मुंह फुलाने से पहले सौ बार सोचने पर मजबूर करेगा।
रूस को बातचीत में शामिल करने के फायदे – फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट के इंजन के लिए बातचीत में रूस को शामिल करना लड़ाकू विमानों के इंजन बनाने में रूस के डेवलपमेंट को दिखाता है। इससे भारत के AMCA लड़ाकू विमानों के समय से निर्माण में मदद मिल सकती है, क्योंकि रूस ना सिर्फ समय पर भारत को इंजन देगा, बल्कि स्वदेशी इंजन के निर्माण में भी कई तरह से मदद करेगा। भारत का मकसद एक स्टील्थ, मल्टी रोल लड़ाकू विमान बनाना है और रूस पहले ही फिफ्थ जेनरेशन लड़ाकू विमान Su-57 ऑपरेट कर रहा है। डिफेंस न्यूज ने AMCA कार्यक्रम से परिचित सूत्रों के हवाले से बताया है कि रूस की सरकारी डिफेंस कंपनी रोस्टेक ने अपने 177s इंजन का प्रस्ताव भारत के सामने रखा है। 177s को AL-41F1 और AL-51 पावरप्लांट के हाइब्रिड के रूप में पेश किया गया है। 177s को विशेष रूप से पांचवीं पीढ़ी के सामरिक विमानों के लिए डिजाइन किया गया है और दावा किया जाता है कि यह ज्यादा थ्रस्ट, बेहतर ईंधन दक्षता और लड़ाकू विमानों को लंबे समय तक उड़ान भरने लायक क्षमता देती है।
डिफेंस न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक 177S इंजन, रोस्टेक के यूनाइटेड इंजन कॉरपोरेशन (UEC) का एक प्रोडक्ट है और रूसी इंजन टेक्नोलॉजी की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। इसमें AL-41F1 (वर्तमान में सुखोई Su-57 “फेलन” में लगा) और ज्यादा एडवांस AL-51 की टेक्नोलॉजी को शामिल किया गया है। इस इंजन के 14,500kgf (लगभग 142 kN) का मैक्सिमम थ्रस्ट प्रदान करने की जानकारी आई है। रिपोर्ट के मुताबिक इस फाइटर जेट इंजन की कुल सर्विस लाइफ 6,000 घंटे तक होने का अनुमान है, जो भारत के Su-30 MKI बेड़े में इस्तेमाल किए जाने वाले AL-31FP जैसे पुराने इंजनों से काफी ज्यादा है। इसके अलावा, रिपोर्ट बताती है कि 177S ईंधन की खपत में कम से कम 7% की कमी हासिल करता है, जो AMCA जैसे स्टील्थ विमान की सीमा को बढ़ाने के लिए काफी महत्वपूर्ण है।
भारत के लिए बेहतरीन रहेगा रूसी इंजन! – रूस के एक अधिकारी ने सुझाव दिया है कि ये इंजन फाइटर जेट्स के लिए अतिरिक्त स्पीड हासिल करने की शक्ति प्रदान करती है, जो भारत के लिए बेहतरीन साबित होगा। रूसी अधिकारी ने आगे प्रस्ताव दिया है कि भारत 2डी फ्लैट नोजल डिजाइन को शामिल करके इंजन के प्रदर्शन को अपने वातावरण के हिसाब से डिजाइन भी कर सकता है, जो अमेरिकी एफ-22 रालोर पर इस्तेमाल किए गए डिजाइन की याद दिलाता है। इंजन पर बातचीत में रूस को शामिल करने से भारत के सामने एक शानदार विकल्प आ गया है और उसे पश्चिमी देशों की कंपनियों के साथ अपनी शर्तों पर बातचीत करने में मदद हासिल होगी। भारत अपने AMCA कार्यक्रम में कोई व्यवधान नहीं चाहता है और भारत की कोशिश AMCA प्रोजेक्ट को छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों जैसी कुछ ताकतों से जोड़ना है। लिहाजा रूस को शामिल करना एक बेहतनीर रणनीतिक फैसला है।
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