
INF संधि पर तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन और रूसी राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव ने दस्तखत किए थे। जिसका मकसद किसी भी तरह के परमाणु संघर्ष को टालना था। 2019 में डोनाल्ड ट्रंप ने इस संधि से अमेरिका को बाहर निकालते हुए तर्क किया था कि रूस संधि का उल्लंघन कर रहा है।
रूस ने सोमवार को बहुत बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वो अब खुद को 1987 की इंटरमीडियएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेस ट्रिटी (INF) से बंधा हुआ नहीं मानता है। यानि रूस ने INF से बाहर निकलने की घोषणा कर दी है। जिसका मतलब है कि पश्चिमी देशों की बदमाशी की वजह से दुनिया धीरे धीरे परमाणु संकट की तरफ बढ़ने लगी है। इसके साथ ही रूसी राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जुबान संभालकर बोलने की नसीहत दी है। क्रेमलिन ने ये बयान डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने रूस के करीब 2 परमाणु पनडुब्बियों की बात कही थी। रूस ने डोनाल्ड ट्रंप को परमाणु हथियारों पर बोलते वक्त ‘बहुत, बहुत ज्यादा संभलकर’ बोलने को कहा है। रूस ने INF से बाहर निकलने के फैसले के पीछे ‘पश्चिमी देशों की कार्रवाइयों’ को वजह बताया है। रूसी समाचार एजेंसी आरटी की तरफ से प्रकाशित एक बयान में, रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि संधि को बनाए रखने की शर्तें “गायब” हो गई हैं और देश अब अपने पिछले खुद की तरफ से लगाए प्रतिबंधों का पालन नहीं कर रहा है।
रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि फिलीपींस में टाइफॉन मिसाइल लांचर की तैनाती और ऑस्ट्रेलिया में तालिस्मन सेबर अभ्यास के दौरान मिसाइल दागने सहित अमेरिकी गतिविधियां उसके इस फैसले के पीछे प्रमुख वजहें हैं। आपको बता दें कि INF संधि का मकसद 500 से 5,500 किलोमीटर की रेंज वाले जमीन से लॉन्च किए जाने वाले परमाणु और पारंपरिक मिसाइलों पर प्रतिबंध लगाना था। अमेरिका और रूस के बीच ये संधि 1987 में हुई थी और अमेरिका 2019 में डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में इस संधि से बाहर आ गया था।
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