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डियर डैड्स बेटों को यौवन से जुड़ी ये 5 बातें जरूर समझाएं, ताकि इरेक्शन और स्वप्नदोष से न हों शर्मसार


पेरेंटिंग लाइफ कोच शंशाक शर्मा के मुताब‍िक, डैड्स को बेटों को यह भी बताना चाहिए कि इस उम्र में मूड स्विंग्स, अट्रैक्शन या कन्फ्यूजन महसूस करना पूरी तरह सामान्य है। उन्हें समझाएं कि ये भावनात्मक बदलाव हर लड़के के साथ होते हैं। इसील‍िए इसको लेकर परेशान न हो, बल्‍क‍ि खुलकर बात करें।
जब बच्चे बड़े होने लगते हैं, तो उनके भीतर शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं। कई बार प्यूबर्टी के दौरान होने वाले ये बदलाव बच्चों को बहुत ज्यादा परेशान कर देते हैं। उन्हें यह समझ नहीं आता कि उनकी बॉडी में इस तरह के बदलाव क्यों हो रहे हैं, जिसकी वजह से वे घबरा भी जाते हैं। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि माता-पिता इस विषय पर बच्चों से खुलकर बात करें।
वहीं, इस मामले में पेरेंटिंग लाइफ कोच शंशाक शर्मा का कहना है कि खासतौर पर बेटों के मामले में पिताओं को यह जिम्मेदारी खुद उठानी चाहिए। उन्हें यौवन से जुड़े कुछ जरूरी फैक्ट्स अपने बेटों को बताने चाहिए, ताकि वे इरेक्शन और स्वप्नदोष जैसी नैचुलर चीजों को लेकर शर्मसार न हों। आइए जानते हैं क‍ि आख‍िर कौन सी 5 बातें बेटों को प‍िता को समझानी चाह‍िए।
बेटों को प्‍यूबर्टी के बारे मं बताने के ल‍िए चुनें 9 से 12 साल की उम्र – ​प्यूबर्टी के बारे में बेटों से बात करने के लिए सबसे पहले पिताओं को सही उम्र चुनने पर ध्यान देना चाहिए। आमतौर पर 9 से 12 साल की उम्र के बीच बच्चों में शारीरिक और भावनात्मक बदलाव शुरू हो जाते हैं। इसीलि‍ए यही वह समय होता है, जब बेटों से प्यूबर्टी पर खुलकर और सहज तरीके से बात की जा सकती है। इस दौरान यह ध्‍यान रखें कि बातचीत की भाषा सरल, साफ और साइंटिफिक बेस्ड हो। बदलावों को सामान्य प्रक्रिया के रूप में समझाएं।
सही समय के साथ-साथ सही माहौल चुनना भी जरूरी – इस बारे में बात करने के ल‍िए सही समय के साथ-साथ सही जगह और सही माहौल चुनना भी बेहद जरूरी है। इसके लिए आप टहलते समय, गाड़ी चलाते हुए या साथ में कोई एक्टिविटी करते हुए यह बातचीत शुरू कर सकते हैं। ध्यान रखें कि उस समय कोई डिस्ट्रैक्शन न हो और न ही किसी तरह का दबाव हो । बातचीत सहज और दोस्ताना होनी चाहिए। इस दौरान बेटों से सिर्फ शारीरिक बदलाव ही नहीं, बल्कि मानसिक और इमोशनल बदलावों पर भी बात करना जरूरी है।
सीधे प्‍यूबर्टी के टॉप‍िक पर न आएं – बेटों से प्यूबर्टी पर बात करते समय सीधे इसी टॉपिक पर न आएं। बातचीत की शुरुआत हल्के और नैचुरल तरीके से करें। जैसे आप उनसे कह सकते हैं-’जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ेगी, आपके शरीर और दिमाग में कुछ बदलाव आएंगे। क्या आपने कभी अपने अंदर या अपने दोस्तों में कुछ अलग देखा है?’
ऐसे बेटों को नहीं लगता है लेक्‍चर – इस तरह सवाल पूछने से बातचीत सिर्फ एक लेक्चर नहीं रहती, बल्कि दो-तरफ बातचीत बन जाती है। बच्चा अपनी बात खुलकर रखने लगता है और उसे लगता है कि उसकी बात सुनी जा रही है। इससे भरोसा बनता है और आगे चलकर वह ऐसे मुद्दों पर आपसे बात करने में झिझकता नहीं है।
बेटों को बताएं क‍ि प्‍यूबर्टी आने पर बदलती है आवाज, इरेक्‍शन और वेट ड्रीम्‍स हैं नॉर्मल – बच्‍चों को फिजि‍कल चेंजेस के बारे में खुलकर और सहज भाषा में बताएं। उन्हें समझाएं कि उकनी आवाज में बदलाव आ सकता है, जो कुछ भारी या गहरी हो सकती है, चेहरे और शरीर पर बालों का उगना शुरू हो जाएगा, लंबाई में बढ़ेगी, पसीना आना और शरीर से बदबू आना सामान्य हैं। इसके अलावा, इरेक्शन और वेट ड्रीम्स (स्वपनदोष) भी होने लगते हैं। बच्चों को यह समझाना कि ये सभी बदलाव सामान्य हैं और शर्मिंदगी वाली बात नहीं है।