
वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुशल पेशवरों के बैकलाग में कमी लाने के लिए वीजा लॉटरी सिस्टम को समाप्त करने का प्रस्ताव रखा है। इस योजना से उन हजारों भारतीय आइटी पेशेवरों को लाभ हो सकता है जो दशकों से ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे हैं। यह प्रस्ताव अगर कांग्रेस (संसद) के दोनों सदनों से पारित हो जाता है तो इससे कुशल पेशेवरों के लिए ग्रीन कार्ड के बैकलाग में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
ट्रंप प्रशासन डाइवर्सिटी इमीग्रेशन वीजा प्रोग्राम खत्म करना चाहता है। इसके तहत हर साल करीब 50 हजार लोगों को ग्रीन कार्ड के लिए वीजा दिया जाता है। ट्रंप इस वीजा प्रणाली के खिलाफ हैं। हाल में न्यूयॉर्क में हुए आतंकी हमले के मुख्य आरोपी समेत अमेरिका में पनपे कई आतंकी इसी डाइवर्सिटी वीजा या परिवार आधारित वीजा पर अमेरिका में दाखिल हुए थे। इस प्रोग्राम के तहत हर साल 50 हजार ग्रीन कार्ड उन देशों के प्रवासियों को मुहैया कराए जाते हैं जहां से अमेरिका आने वाले प्रवासियों की दर बहुत कम है। इसके अलावा परिवार, रोजगार, शरणार्थी और शरण लेने के आधार पर ग्रीन कार्ड जारी किए जाते हैं।
एच1बी वीजा की संख्या बढ़ाने का बिल सीनेट में पेश
अमेरिकी सीनेट में शुक्रवार को एच1बी वीजा की संख्या बढ़ाने का एक बिल पेश किया गया। इसे दो रिपब्लिकन सांसदों ओरिन हैच और जैफ फ्लैक की तरफ से लाया गया है। दोनों सीनेटरों का मानना है कि इसका लाभ उठाकर दुनियाभर से “सबसे अच्छे और होनहार” व्यक्ति अमेरिका आ सकेंगे। एच1बी वीजा धारक की पत्नी और उसके आश्रित बच्चों को भी अमेरिका में काम करने का अधिकार मिलता है। एक संयुक्त बयान में हैच और फ्लैक ने कहा कि यह बिल वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिकी प्रतिस्पर्धा को बनाए रखने में मददगार साबित होगा।
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