
वॉशिंगटनः अमरीकी सुप्रीम कोर्ट (SC) ने मंगलवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के नए यात्रा प्रतिबंध को आंशिक रूप से लागू करने की इजाजत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के खिलाफ दायर चुनौती को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि यह फैसला मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव करता है। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत की राय के आधार पर यह फैसला सुनाया। उनके पैनल में 4 अन्य जज शामिल थे। बता दें कि ट्रंप का कहना है कि यात्रा प्रतिबंध आतंकवादियों को अमरीका में आने से रोकेगा जो देश की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
पिछले साल छह मार्च को ट्रंप ने सभी शरणार्थियों और छह मुस्लिम बहुल देशों के नागरिकों के अमरीका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया था। ट्रंप ने ईरान, लीबिया, सूडान, सोमालिया, सीरिया और यमन के नागरिकों के अमरीका आने पर 90 दिन की पाबंदी और शरणार्थियों के आने पर 120 दिन की रोक लगा दी थी। अमरीकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस विवादास्पद फैसले को बरकरार रखा है जिसमें उन्होंने 7 मुस्लिम बहुल देशों को अपने यहां पर आने पर प्रतिबंध लगा दिया था। 9 सदस्यीय जजों की पीठ में इसके पक्ष में 5:4 वोट दिया गया।
चीफ जस्टिस जॉन जी. रॉबर्ट्स ने लिखा कि राष्ट्रपति के पास आव्रजन के नियमन की पर्याप्त शक्ति है। उन्होंने इस कानून को चुनौती देने वालों की यह दलील खारिज कर दी कि इसकी भावना मुस्लिम विरोधी है। उन्होंने हालांकि सावधानीपूर्वक सामान्य रूप से आव्रजन और खास तौर पर मुसलमानों को लेकर ट्रंप के भड़काउ बयानों का समर्थन नहीं किया। रॉबर्ट्स ने लिखा, ‘हम नीति की गंभीरता को लेकर कोई राय व्यक्त नहीं कर रहे। कोर्ट के इस फैसले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे अमरीका के लोगों और संविधान की जीत करार दिया है।
उन्होंने एक बयान में कहा कि कोर्ट ने अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर उठाए गए राष्ट्रपति के कदमों का सही माना है। उन्होंने कोर्ट के फैसले के बाद ट्वीट करते हुए लिखा- Wow। गौरतलब है कि मुस्लिम बहुल देशों पर अमरीका राष्ट्रपति की तरफ से प्रतिबंध के आदेश की दुनिया भर में किरकिरी हुई थी। उसके बाद ट्रंप के इस फैसले को कोर्ट में चुनौती दी गई थी। गौरतलब है राष्ट्रपति ट्रंप की यात्रा प्रतिबंध पॉलिसी जिन देशों पर लागू होती है उनमें मुस्लिम बहुल देश ईरान, लीबिया, सोमालिया, सीरिया और यमन शामिल हैं।
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