
कैंसर से बीमार मां को ठीक करने में जितना योगदान डॉक्टरों का था, उतना ही योग का भी था। योग की वजह से ही कीमो के बाद मां जल्दी से रिकवर हुई तो इसका उसके 7 साल के बेटे के जेहन पर ऐसा पड़ा। अब वह दुनिया का यंगेस्ट योगा टीचर बन गया। 7 साल से योग सीखा रहे तबे एटकिन्स अब 14 साल के हो चुके हैं और सप्ताह में तीन क्लासें लेते हैं। इसमें वह सात अलग अलग तरह के कोर्स सर्टीफिकेट की ट्रेनिंग देते हैं।
तबे की मां साहेल अनवारिनजाद को 2012 में कैंसर हुआ। वह खुद को काफी बेबस महसूस करने लगी थी। बेटे तबे ने बताया, कीमो के दौरान मां के बाल झड़े तो उन्होंने भी सिर मुंडवा लिया ताकि मां की पीड़ा को महसूस कर सके। उन्होंने देखा कि योग ने कैंसर से मायूस हो चुकी मां को ठीक होने में नई दिशा दी। इसके बाद उन्होंने लोगों को जागरूक करने की ठानी। दूसरों के लिए चटाई पर ही चिकित्सा खोजने में मदद की।
योग से मां ने कैंसर को मात दी
योग ने तबे की मां के जीवन में फिर से चलने और खुशी पाने में मदद की। तबे कहते हैं, योग ने जादू जैसा काम किया। मां अपने दम पर चलने में सक्षम थी। योग की बदौलत मेरी मां ने कैंसर को मात दे दी थी। इस सब से मैं इतना खुश था कि मैंने योग शिक्षक बनने की ठान ली। मैं चाहता था कि कैंसर या कोई और बीमारी किसी की मां को उनसे दूर न कर पाए।
सिंगल मॉम होने के कारण जल्द ठीक होना चाहती थीं:साहेल
अप्रैल 2012 में साहेल को स्टेज 3 कैंसर का पता चला था। साहेल बताती हैं कि मैं सांस तक नहीं ले पा रही थी। ये भी नहीं पता था कि मैं बच पाऊंगी या नहीं। इलाज शुरू हो गया। सिंगल मॉम होने के कारण मुझे तबे की फिक्र थी। डॉक्टरों का कहना था कि शरीर कमजोर होने के कारण बीमारी फिर से हो सकती है। सितंबर 2012 में डॉक्टरों ने साहेल को बताया कि वह कैंसर-मुक्त हैं। इसके बाद कमजोर शरीर को हेल्दी रखने का चैलेंज था। इसमें योग काम आया। किसी के कहने पर साहेल ने योग क्लासेस जॉइन कर ली। नतीजा शानदार था और जल्द वे स्वस्थ होने लगीं।
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