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चीन ने बढ़ाई अमरीका की टैंशन, खतरे में भारत


साउथ  चाइना सी विवाद हो या प्रशांत महासागर में बढ़ती गतिविधियां चीन न सिर्फ एशियाई देशों के लिए सिर दर्द बना हुआ है बल्कि अमरीका के लिए भी चुनौती बनकर उभरा है। बेशक अमरीका और उसके सहयोगी देशों ने लगभग 3 दशकों तक आसमान पर राज किया और हवा में अपने युद्ध कौशल का लौहा मनवाया लेकिन रूस और चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच अब हालात बदल चुके हैं।
सेना मजबूत करने में लगा चीन
एक रिपोर्ट के मुताबिक अमरीका के साथ बढ़ते तनाव को देखते हुए चीन लगातार अपनी सेना को मजबूत करने में लगा हुआ है। चीन ने जमीन के बाद अब आसमान में भी अपनी सैन्य ताकत बढ़ा दी है। चीन की बढ़ती सैन्य ताकत जहां अमरीका के लिए परेशानी का कारण बन रही है वहीं भारत के लिए भी खतरे की घंटी है। दरअसल मिलिट्री खर्च और टैक्नोलॉजी के मामले में चीन के सामने भारत कहीं नहीं टिकता।
आर्म्स ट्रेड और वेस्टर्न एयरफोर्स का बदला खेल
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट की माने तो चीन ने पिछले कुछ सालों में अपने एयरोस्पेस इंडस्ट्री में जबरदस्त विकास किया है। खासकर एयरक्राफ्ट से एयर-टू-एयर मिसाइल सिस्टम ने तो पूरे ग्लोबल आर्म्स ट्रेड और वेस्टर्न एयरफोर्स का पूरा खेल ही बदल डाला है।ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी देशों की वायु सेनाओं और वैश्विक आर्म्स ट्रेड के लिए परिस्थितियां बदल रही हैं। खासतौर से एयरक्राफ्ट से दागे जानेवाले एयर-टु-एयर मिसाइल सिस्टम्स के क्षेत्र में चीन ने अपना सिक्का जमा लिया है। सैन्य खर्च के मामले में अमरीका के बाद चीन का दूसरा नंबर है। पिछले साल चीन ने अपने सैन्य खर्च में 8.1 प्रतिशत वृद्धि कर 228 बिलियन डॉलर हथियारों पर खर्च किया।
अमरीका और उसके सहयोगियों के लिए बड़ी सामरिक चुनौती
स्टॉकहोम इंटरनैशनल पीस रिसर्च इंस्टीच्यूट (SIPRI) के मुताबिक 2017 में चीन का रक्षा खर्च अमरीकी डॉलर में 5.6 फीसदी बढ़ गया, जबकि रूस का 20 फीसदी घट गया। SIPRI ने बताया कि चीन ने पिछले साल 228 अरब डॉलर और रूस ने 66.3 अरब डॉलर खर्च किया था। जानकारी के अनुसार एयर फोर्स को आधुनिक बनाने में रूस सबसे आगे रहा है और लगातार इस दिशा में काम भी कर रहा है। चीन की करीब 13 ट्रिलियन डॉलर (13 लाख करोड़ डॉलर) की अर्थव्यवस्था है और अब वह अमरीका और उसके सहयोगियों के लिए बड़ी सामरिक चुनौती पेश कर सकता है।
चीन के बढ़ते दबदबे को समझने के लिए इंटरनैशनल इंस्टीच्यूट फॉर स्ट्रैटिजिक स्टडीज में का ये बयान ही काफी है जिसमें उन्होंने कहा है कि पहले हम जो चाहें हवा में कर सकते थे, पर जो चीन ने किया है उसके बाद अब ऐसा संभव नहीं होगा।’ इसके परिणामस्वरूप अमरीकी कमांडरों को अब पायलटों और एयरक्राफ्ट को होनेवाले संभावित नुकसान पर भी गौर करना होगा, जो 80 के दशक में उनके लिए जरूरी नहीं था। PunjabKesariचीन की नई बेस्ट PL-10 मिसाइल ‘फायर एंड फोर्गेट’
चीन ने जब पहली बार PL-15 एयरक्राफ्ट को लॉन्च किया तब तत्कालीन यूएस एयरफोर्स कॉम्बेट कमांड चीफ हेर्बर्ट हॉक कार्लिस्ले ने कांग्रेस में चिंता व्यक्त की थी। चीन की यह मिसाइल हवा से हवा में अटैक करने वाली बहुत ही चुस्त और फुर्तीली है, जो 70 से 100 किमी तक दुश्मन को नेस्तनाबूद करने की ताकत रखती है। फिर चीन की एक और एयर-टू-एयर मिसाइल PL-XX, जो धीमी गति से चलने वाली एयरबोर्न चेतावनी और कंट्रोल सिस्टम है। चीन की नई बेस्ट PL-10 मिसाइल ‘फायर एंड फोर्गेट’, जो किसी भी हवा में आ रही किसी भी मिसाइल को खत्म कर देगी।
ट्रायंगल वेपन एक्सपोर्ट-इंपोर्ट भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा
अब भारत के लिए चिंता का विषय चीन की बढ़ती सैन्य ताकत से ज्यादा बीजिंग से होकर पाकिस्तान तक हथियार पहुंचना है। चीन के नए एयरक्राफ्ट, एयर-टू-एयर, क्रूज, एंटी-शिप और रूस के S-400 एयर-डिफेंस सिस्टम (जिसे दुनिया का सबसे बेस्ट एयरक्राफ्ट माना जा रहा है) ने अमरीका ने प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में बहुत अधिक जोखिम में काम करने की ताकत को बढ़ाई है। तेजी से बदल रही इन परिस्थितियों के कारण न सिर्फ अमरीका बल्कि भारत भी पूरी तरह से चीन पर नजर रख रहा है। चीन को रूस हथियार दे रहा है और पाकिस्तान चीन से हथियार ले रहा है। यह ट्रायंगल वेपन एक्सपोर्ट-इंपोर्ट सिस्टम ही एशिया में भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा पैदा कर रहा है।