
पाकिस्तान में चीन के राजदूत, जियांग जैदोंग ने पिछले दिनों, चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) को लेकर बड़ा बयान दिया है। जायदोंगे ने सोमवार को सीपीईसी को एक जगह लाने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने कृषि और माइनिंग सेक्टर में चीन की तरफ से आपसी सहयोग की भी पेशकश की। उनकी मानें तो चीन का मकसद इस तरह से पाकिस्तान के आर्थिक संकट को कम करना है। जैदोंगे के बयान से तो यही लगता है कि चीन अब परियोजना का दूसरा चरण लॉन्च करने की तैयारी में है। सीपीईसी का भारत ने अक्सर विरोध किया है। भारत मानता है कि यह परियोजना संप्रभुता के खिलाफ है। इसका एक हिस्सा पीओके से होकर गुजरता है।
21वीं सदी की अर्थव्यवस्था – पाकिस्तान के अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक जैदोंग ने सीपीईसी के तहत अगले दशक के लिए चीन के दृष्टिकोण को विस्तार से बताया। जैदोंगे ने जो कुछ कहा उसके मुताबिक पाकिस्तान को ब्रिक्स-मोर्टार मॉडल की बजाय 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। राजदूत ने चीन के विद्वान विक्टर गाओ के भाषण से पहले बयान दिया। गाओ ने पाकिस्तान से रिक्वेस्ट की है कि वह सीपीईसी को सिर्फ इनफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं के चश्मे से ही न देखे।
सड़क परियोजना का कोई जिक्र नहीं – चीनी राजदूत ने आने वाले समय में सहयोग के लिए तीन प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया। उन्होंने सीपीईसी के वर्तमान चरण का एकीकरण, कृषि और खनन में सहयोग को गहरा करना और छोटी लेकिन प्रभावशाली परियोजनाओं के माध्यम से लोगों की आजीविका में सुधार करने के बारे में बात की। राजदूत जैदोंग ने मेनलाइन-I और KCR (कराची सर्कुलर रेलवे) जैसी परियोजनाओं को पूरा करने पर भी जोर दिया। साथ ही एकीकरण की जरूरत पर भी रोशनी डाली। राजदूत ने किसी भी सड़क परियोजना का कोई जिक्र नहीं किया है।
अहम समझौते हुए साइन – अंतरिम प्रधान मंत्री अनवारुल हक काकर की चीन यात्रा के दौरान, दोनों देशों ने सीपीईसी की मेनलाइन-I परियोजना के लिए एक परिशिष्ट पर हस्ताक्षर किए थे। इससे इसका दायरा और डिजाइन कम होकर 6.7 अरब डॉलर से एक तिहाई कम हो गया। पाकिस्तान और चीन ने सीपीईसी के तहत खनिज क्षेत्र के विकास और औद्योगिक सहयोग के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य भूविज्ञान, खनिज संसाधनों की जांच, मूल्यांकन और विकास, खनिज उत्पाद विकास, प्रसंस्करण, व्यापार और निवेश प्रोत्साहन के क्षेत्र में गहन सहयोग की सुविधा प्रदान करना है।
सीपीईसी को लेकर जिनपिंग की सोच – पाकिस्तान और चीन ने सीपीईसी के तहत खनिज क्षेत्र के विकास और औद्योगिक सहयोग के लिए एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए है। इनका मकसद भू-विज्ञान, खनिज संसाधनों की जांच, मूल्यांकन और विकास, खनिज उत्पाद विकास, प्रसंस्करण, व्यापार और निवेश प्रोत्साहन के क्षेत्र में गहन सहयोग की सुविधा प्रदान करना है। राजदूत ने सीपीईसी के अपग्रेडेड वर्जन से पाकिस्तान को रुबरु करवाया जो राष्ट्रपति शी जिनपिंग के दिमाग का आइडिया है। यह अपग्रेडेड वर्जन पांच कॉरिडोर के साथ मिलकर बना होगा।
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