
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) ने कहा है कि यदि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) अपनी विशेष आम बैठक में क्रिकेट को नुकसान पहुंचाने वाला कोई निर्णय लेता है तो वह फिर इस मसले में हस्तक्षेप करने और इसे शीर्ष अदालत तक ले जाने से पीछे नहीं हटेंगे।
सीओए का यह बयान ऐसे समय आया है जब बीसीसीआई के अधिकारियों ने एक दिन पहले ही राज्य संघों के सदस्यों की अचानक से कांफ्रेस कॉल आयोजित कर उनसे आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी से हटने को लेकर उनकी राय मांगी थी। सीओए का नेतृत्व कर रहे विनोद राय ने बोर्ड के इस कदम की आलोचना भी की थी।
सीओए ने चेतावनी भरे अंदाज में राज्य क्रिकेट संघों को बुधवार सुबह भेजे ई-मेल के जरिए यह मैसेज भेजा है कि यदि 7 मई को आयोजित होने वाली विशेष आम बैठक में बीसीसीआई कोई ऐसा फैसला लेता है जिससे भारतीय क्रिकेट को नुकसान पहुंचे और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) में उसकी समझौते की कोशिशों को धक्का लगे तो वह इस मसले को सर्वाेच्च अदालत तक ले जा सकता है।
बीसीसीआई ने आगामी रविवार को एसजीएम बैठक बुलाई है जिसमें आईसीसी में राजस्व मॉडल को लेकर भारत को हुए नुकसान और चैंपियंस ट्रॉफी में खेलने को लेकर सदस्यों की राय पूछी जाएगी। यह बीसीसीआई की एक महीने से कम समय में दूसरी एसजीएम है। इससे पहले 18 अप्रेल को भी एसजीएम बुलाई गई थी, जिसमें सचिव अमिताभ चौधरी और सीईओ राहुल जौहरी को आईसीसी में अपना पक्ष रखने के लिए नियुक्त किया गया था।
नए वित्तीय मॉडल का विरोध कर रहे बीसीसीआई के पक्ष को आईसीसी ने खारिज कर दिया था। इसके बाद बीसीसीआई के पदाधिकारी आईसीसी के इस निर्णय के खिलाफ उसे कानूनी नोटिस भेजने पर भी विचार कर रहा था जिसे सीओए के हस्तक्षेप के बाद रोक देना पड़ा।
बीसीसीआई के समयसीमा बीत जाने के बाद भी एक जून से इंग्लैंड में होने वाली चैंपियंस ट्राफी के लिए टीम घोषित नहीं करने के बाद माना जा रहा है कि बोर्ड विरोध स्वरूप आईसीसी चैंपियंस ट्राफी से हटना चाहता है। हालांकि इसके लिए उसे सदस्य भागीदारी समझौता(एमपीए) तोडऩा होगा।
लेकिन सीओए का इस पूरे मामले में अलग ही रूख है और उसका मानना है कि एमपीए समाप्त करने से आईसीसी में भारतीय बोर्ड के समझौते के प्रयासों को झटका लगेगा। सीओए ने राज्य संघों को भेजे अपने ईमेल में कहा कि यह भारतीय क्रिकेट के हित में होगा यदि बीसीसीआई आईसीसी के साथ 2014 में पेश वित्तीय मॉडल को लेकर जारी समझौता प्रयासों को जारी रखे ताकि किसी सही निर्णय पर पहुंचा जा सके।
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