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गर्मियों की छुट्टियों में बच्चों को सिखाएं कुकिंग और क्लीनिंग समेत ये 3 स्किल्स, जिंदगी भर आएंगी उनके काम


अगर आप भी सोच रहे हैं कि इस गर्मियों की छुट्टियों में बच्चों को क्या नया सिखाएं, जो उनकी पूरी जिंदगी काम भी आए, तो यह सही समय है उन्हें कुछ जरूरी लाइफ स्किल्स सिखाने का। आप बच्चों को क्लीनिंग और सेल्फ-केयर जैसी आदतें सिखा सकते हैं। ये न सिर्फ उन्हें आत्मनिर्भर बनाती हैं, बल्कि उन्हें जिम्मेदार और अनुशासित भी बनाती हैं।
बच्चों की पसंदीदा गर्मियों की छुट्टियां जल्द ही शुरू होने वाली हैं। हालांकि, समर वेकेशन सिर्फ खेलने और घूमने का समय नहीं है, बल्कि नई-नई चीजें सीखने का बेहतरीन मौका भी होता है। इस दौरान पेरेंट्स बच्चों को कुकिंग और पर्सनल हाइजीन जैसी कई जरूरी लाइफ स्किल्स सिखा सकते हैं, जो उन्हें भविष्य के लिए तैयार करती हैं। साथ ही, ये सीख जीवनभर उनके काम आती है। आइए, इनके बारे में विस्तार से जानते हैं।
1: कुक‍िंग – खाना बनाना एक जरूरी लाइफ स्किल है, जो हर इंसान को आनी चाहिए। यह न सिर्फ जरूरत पड़ने पर खुद का पेट भरने में मदद करता है, बल्कि व्यक्ति को दूसरों पर निर्भर होने से भी बचाता है। बच्चों को यह स्किल छोटी उम्र से सिखाना इसलिए जरूरी है, ताकि आगे चलकर हॉस्टल में रहना, अकेले रहना या नए शहर में काम करना उनके लिए आसान हो जाए। ऐसी आदतें बच्चों में आत्मनिर्भरता और जिम्मेदारी बढ़ाती हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास भी मजबूत होता है।
ब्रेकफास्‍ट – आप चाहें तो बच्चों को ब्रेकफास्ट से लेकर डिनर तक के लिए कुछ जल्दी बनने वाले आसान और हेल्दी ऑप्शन सिखा सकते हैं। उदाहरण के लिए, नाश्ते में पोहा, उपमा, इडली, ओट्स और पनीर सैंडविच जैसे ऑप्शन सिखाए जा सकते हैं। अगर आप अंडा खाते हैं, तो बच्चे को ऑमलेट बनाना भी सिखा सकते हैं।
लंच में दाल-चावल बनाना सिखाएं – लंच में दाल-चावल एक बेहतरीन और जल्‍दी बनने वाला विकल्प है। इसके अलावा आप उन्हें रोटी बनाना, सब्जी तैयार करना और सलाद काटना जैसी बेसिक चीजें भी सिखा सकते हैं। शुरुआत में आसान रेसिपी से शुरुआत करें, ताकि बच्चे का आत्मविश्वास बढ़े और वह किचन में दिलचस्पी लेने लगे।
ड‍िनर – डिनर के लिए आप बच्चों को खिचड़ी, वेज पुलाव, सूप या फिर हल्की-फुल्की सब्जी और रोटी बनाना सिखा सकते हैं। ये सभी चीजें जल्दी बनती हैं और हेल्दी भी रहती हैं।
2: साफ-सफाई (क्‍लीन‍िंग) – इस समर वेकेशन में माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को क्लीनिंग यानी साफ-सफाई की आदत जरूर सिखाएं। यह एक ऐसी स्किल है, जो न सिर्फ अनुशासन सिखाती है, बल्कि उन्हें जिम्मेदार भी बनाती है। शुरुआत आप छोटे-छोटे कामों से कर सकते हैं। जैसे बच्चों से कहें कि वे अपना बेड खुद अरेंज करें, बेडशीट ठीक से बिछाएं और तकिया सही जगह पर रखें। इसके अलावा, उन्हें अपनी स्टडी टेबल साफ करने और खिलौनों को सही जगह पर रखने की आदत डालें। साथ ही, इस्तेमाल की हुई चीजों को वापस अपनी जगह पर रखने के लिए प्रेरित करें।
इन छोटी-छोटी आदतों से बच्चों में ऑर्गनाइजेशन स्किल विकसित होती है और वे धीरे-धीरे रोजमर्रा के काम खुद संभालना सीख जाते हैं, जिससे भविष्य में उन्हें किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। साथ ही यह साफ-सफाई की आदत बच्चों में अपनी चीजों के प्रति अपनापन भी लाती है। जब बच्चे खुद क्‍लीन‍िंग करते हैं, तो वह जगह सिर्फ ‘मम्मी-पापा की बताई हुई जगह या चीज’ नहीं रहती, बल्कि उनकी अपनी बन जाती है। इससे वे अपनी चीजों को अपना समझते हैं और उनका ध्यान रखना सीखते हैं। यही आदत आगे चलकर अच्छी दिनचर्या और व्यवस्थित जीवन की नींव बनती है। ऐसे बच्चे बड़े होकर कम तनाव महसूस करते हैं और अपने काम को बेहतर तरीके से संभाल पाते हैं।
3: सेल्फ-केयर – कम उम्र से ही बच्चों में सेल्फ केयर की आदतडालना उनके भविष्य के लिए जरूरी है और इसकी शुरुआत गर्मियों की छुट्टियों में आसानी से की जा सकती है। माता-पिता इन दिनों बच्चों को सिखाएं कि रोज सुबह समय पर उठना, ब्रश करना, नहाना और साफ कपड़े पहनना उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा क्‍यों होना चाहिए। साथ ही, उन्हें यह भी समझाएं कि बिना ब्रश किए कुछ भी खाना क्यों नहीं चाहिए।
इसके अलावा, बच्चों को अपने कपड़ों की देखभाल करना भी सिखाएं। उनकी उम्र के अनुसार, उन्हें वॉशिंग मशीन का इस्तेमाल करना, कपड़ों को अलग-अलग (सफेद और रंगीन) करके धोना और सूखने के बाद उन्हें फोल्ड करके रखना सिखाया जा सकता है। साथ ही, हाथ से कपड़े धोने की बेसिक समझ भी दें, ताकि वे किसी भी स्थिति में अपने काम खुद संभाल सकें।
4: होम एप्लायंस ऑपरेट करना – माता-पिता बच्चों को होम एप्लायंस ऑपरेट करने की बेसिक जानकारी भी दे सकते हैं। उनकी उम्र के अनुसार, उन्हें घर में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों-जैसे वॉशिंग मशीन, माइक्रोवेव, मिक्सर, इंडक्शन चूल्हा या प्रेस का सही यूज करना सिखाएं।
उन्हें यह भी बता सकते हैं कि कौन-सा बटन किस काम के लिए होता है और किसी भी एप्लायंस को चलाने से पहले किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। साथ ही, सेफ्टी रूल्स समझाना न भूलें, जैसे- गीले हाथों से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को न छूना, इस्तेमाल के बाद स्विच ऑफ करना और जरूरत न होने पर प्लग निकाल देना। इस तरह की सीख बच्चों को न सिर्फ तकनीकी रूप से समझदार बनाती है, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए ज्यादा सक्षम भी बनाती है।
5: घर के छोटे-मोटे काम भी स‍िखाएं – बच्चों को घर के छोटे-मोटे काम भी सिखाए जा सकते हैं, जैसे बल्ब या एलईडी लाइट बदलना, एलपीजी सिलेंडर लगाना और रेगुलेटर चेक करना। ध्यान रहे, इन कामों को हमेशा उनकी उम्र और समझ के अनुसार ही सिखाएं। उदाहरण के तौर पर- छोटे बच्चों को इन कामों से दूर रखें, जबकि बड़े बच्चों को धीरे-धीरे आपकी निगरानी में इन्हें करना सिखाया जा सकता है।
मजबूत वयस्क मस्तिष्क की नींव रखता है – आमतौर पर गर्मियों की छुट्टियों को केवल पढ़ाई से ब्रेक के रूप में देखा जाता है। लेकिन साइकोलॉजी के अनुसार, यह समय बच्चों के लिए एक अलग तरह की शिक्षा और लाइफ स्किल्स सीखने का सबसे बेहतर और सटीक मौका होता है। स्कूल के दौरान तो अक्सर सबका ध्यान एकेडम‍िक उपलब्धियों और सोशल स्किल्स पर रहता है, जबकि गर्मियों की छुट्टियां बच्चों को घर के छोटे-मोटे काम सीखने के लिए आवश्यक मानसिक क्षमता प्रदान करती हैं, और वह भी बिना ग्रेड या दबाव के।
वहीं, डेवलपमेंट के ल‍िहाज से भी देखा जाए तो, बच्चों को खाना बनाना, सफाई करना और घर के कामों में योगदान देना सिखाना केवल ‘घरेलू काम’ या जरूरी स्‍क‍िल्‍स स‍िखाना नहीं है। यह मजबूत वयस्क मस्तिष्क की नींव रखने और आत्मनिर्भर बनने की तैयारी भी है।