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अमेरिकी चुनाव में 5 दशक बाद पहली बार दिखेगा बदलाव, बैलेट पर नहीं होगा बुश, क्लिंटन या बाइडन का नाम


बाइडन ने चुनावी रेस से हटने का फैसला अपनी उम्र और सेहत पर उठी चिंताओं के बाद लिया है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना ​​है कि यह मेरी पार्टी और देश के सर्वोत्तम हित में है कि मैं पद छोड़ दूं। बाइडन का राजनीतिक करियर करीब 50 साल का है और उनका हटना एक युग की समाप्ति है।
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने रविवार को कहा कि वह इस साल होने वाले चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार नहीं होंगे। बाइडन के राष्ट्रपति पद की रेस से हटने के ऐलान के साथ ही अमेरिका की राजनीति में एक ‘बदलाव’ आना तय हो गया है। अमेरिका में बीते करीब पांच दशक से हर राष्ट्रपति चुनाव में तीन नाम (सरनेम) जरूर शामिल रहे हैं। ये नाम हैं- बुश, क्लिंटन और बाइडन। 1976 के बाद हुए सभी इलेक्शन में ये नाम राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति पद के लिए मतपत्र पर दिखाई देते रहे हैं। ऐसा इस बार नहींम होने जा रहा है।
अमेरिका में 1976 के चुनाव के बाद इन नामों की एंट्री बैलेट पर हुई थी। साल 1980 में हुए चुनाव में रोनाल्ड रीगन और जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश चुनाव मैदान में थे। 1984 में भी ऐसा ही हुआ और इस चुनाव में रीगन प्रेसीडेंट और बुश उपराष्ट्रपति चुने गए। इसके बाद साल 1988 के इलेक्शन में बुश राष्ट्रपति बन गए। 1992 में जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश फिर से चुनाव मैदान में थे लेकिन वह बिल क्लिंटन से हार गए। बिल क्लिंटन 1996 में फिर लड़े और राष्ट्रपति चुने गए। इसके बाद भी बुश नाम राजनीति में छाया रहा। इसके बाद जॉर्ज डब्ल्यू बुश 2000 और 2004 में अमेरिका के राष्ट्रपति बने।
ओबामा के साथ बाइडन बने उपराष्ट्रपति – अमेरिका में 2008 के चुनाव में बुश मतपत्र से हटे लेकिन बाइडन और क्लिंटन शामिल रहे। 2008 से 2020 तक हर राष्ट्रपति चुनाव में बाइडन या हिलेरी क्लिंटन शामिल रहे हैं। बराक ओबामा और जो बाइडन ने 2008 और 2012 के चुनाव में हिस्सा लिया। बाइडन ने इस दौरान उपराष्ट्रपति का पद संभाला। हिलेरी क्लिंटन 2016 में डोनाल्ड ट्रंप के सामने लड़ीं और हार गईं। इसके बाद जो बाइडन ने 2020 में ट्रंप को राष्ट्रपति चुनाव में हराया।