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इन कारणों से पुरुष करीबी लोगों से भी नहीं कर पाते अपनी भावनाओं के बारे में खुलकर बात

इसमें कोई दोराय नहीं है, कि पुरुष महिलाओं की अपेक्षा अपनी भावनाओं के बारे में बात करना कम पसंद करते हैं। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि उनमें किसी भी तरह से इमोशन कम है। वह केवल इसे बयां करने से बचते हैं। दरअसल, लंबे समय से समाज में यह अवधारणा बनी हुई है, कि जो व्यक्ति ज्यादा भावुक होता, अपने अहसासों के बारे में दूसरों से खुलकर बात कर पाता है, वह वास्तव में कमजोर होता है। क्योंकि ‘मर्द’ कभी कमजोर नहीं हो सकते हैं, इसलिए हर पुरुष खुद को मजबूत साबित करने के लिए अपनी बातों को सीने में दबाए रखता है। जिसके कारण कभी जरूरत पड़ने पर वह अपनों से भी मदद नहीं मांग पाता है।
हालांकि, एक समय था जब पुरुषों को घर से दूर युद्ध भूमि में लड़ने जाना पड़ता था। जहां भावुक होना किसी अभिशाप से कम नहीं था। लेकिन अब समय और चीजें बदल गयी हैं। फिर भी असली मर्द होने की परिभाषा वही है।
एनसो वेलनेस की संस्थापक, वेलनेस कोच अरौबा कबीर बताते हैं कि पुरुष अपनी भावनाओं के बारे में बात करने में सहज नहीं हो पाते हैं, इसके पीछे कई सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यक्तिगत कारण भी होते हैं। इन्हें आप नीचे डिटेल में समझ सकते हैं।
समाज में पुरुषत्व की भूमिका – अपने इमोशन को लंबे समय तक दबाए रखने से व्यक्ति के मानसिक रोगों से ग्रसित होने की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन फिर भी पुरुष इन सब की परवाह किए बगैर तर्कसंगतता और रूढ़िवाद को प्राथमिकता देते हैं।
क्योंकि समाज में उन्हें यही सिखाया जाता है। उनसे अपेक्षा की जाती है, कि वह पत्थर की तरह मजबूत रहे। जिसके कारण कई पुरुषों में इंसानियत भी काफी हद तक मर जाती है।
कमजोर समझे जाने का डर – पुरुष होने की परिभाषा इन्हें अपने वजूद से बहुत अलग कर देता है। ऐसे में यह अपनी भावनाओं को छिपाए रखने में बहुत अच्छा महसूस करते हैं। इसे पुरुष दूसरों के सामने कमजोर नहीं दिखने का एक कारगर तरीका भी मानते हैं।
जो पुरुष अपने करीबी जन से भी खुलकर बात नहीं करते हैं, उसके पीछे का कारण उनकी चिंता होती है, कि अगर वे अपनी भावनाओं के बारे में खुलकर बात करेंगे, तो उन्हें कम सक्षम या कमजोर मर्द के रूप में देखा जाएगा।
दिल की बात खुलकर करने के फायदे – अपनी भावनाओं के बारे में बात करने से तनाव कम होता है। ऐसा देखा गया है कि जो पुरुष स्वस्थ तरीके से अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में सक्षम होते हैं उनमें चिंता, अवसाद और अन्य मानसिक स्वास्थ्य कठिनाइयों के होने की संभावना कम होती है।
इसके अलावा जब आप अपनी भावनाओं को दूसरों के साथ शेयर करते हैं, तो यह जुड़ाव और विश्वास की भावना पैदा करता है, जो आपके जीवन के सभी संबंधों को मजबूत बनाने का काम करता है।
पुरुषों को मन की बात करने के लिए प्रोत्साहित करें – ऐसा करने का एक तरीका पुरुषों को मानसिक स्वास्थ्य और भावनाओं के बारे में बातचीत करने के लिए जागरूक करना है। इसमें किसी मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से बात करना, किसी भरोसेमंद दोस्त या परिवार के सदस्य से खुल कर बात करना, या किसी सहायता समूह से संपर्क करना शामिल हो सकता है।
ध्यान रखें कि मदद मांगना ताकत का प्रतीक है, कमजोरी का नहीं, और यह आपके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।