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देवी लक्ष्मी की बहन का वाहन है ये जीव, बचें इसके वार से अन्यथा…

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प्रकृत्ति ने कुछ ऐसे जीव पैदा किए हैं जो मात्र दिन में ही देख पाते हैं तथा जिन्हें रात में देखने के लिए अतिरिक्त प्रकाश स्रोत की आवश्यकता पड़ती है। कुछ ऐसे भी जीव हैं जो मात्र रात्री में ही देख पाते हैं तथा जिन्हें हम निशाचर कहते हैं उदहारण के तौर पर उल्लू परंतु प्रकृत्ति ने कुछ ऐसे जीव बनाएं हैं जो अंधकार व प्रकाश दोनों ही अवस्थाओं में देख सकते हैं उदाहरण के लिए आम तौर पर पाया जाने वाला जीव है बिल्ली।

बिल्ली और अपशकुन: ज्योतिष तथा वास्तु शास्त्र में शकुन-अपशकुन का महत्व सभ्यता के प्रारंभ से ही किसी न किसी अवधारणा के रूप में विद्यमान रहा है। यात्रा पर जाते समय बिल्ली द्वारा रास्ता काट दे तो ऐसी मान्यता है कि काम बिगड़ जाता है, अतः कुछ समय के लिए लोग अपना जाना स्थगित कर देते हैं। धारणा के अनुसार बिल्लियों का दिखाई देना या इसकी आवाज को भी अपशकुन माना जाता है। शास्त्रानुसार सोते समय बिल्ली का व्यक्ति पर गिरना उसकी मृत्यु का प्रतीक माना जाता है। बिल्ली का रोना तथा आपस में लड़ना गृहक्लेश का सूचक है। यदि बिल्ली किसी वृद्ध स्त्री के सिर पर पंजा मार दे तो उस स्त्री के नाती-पोतों पर संकट पैदा हो जाता है। बिल्ली का चुपके से दूध पी जाना धन के नाश का प्रतीक है। बिल्ली का पालना भी अशुभता का प्रतीक है।

अलक्ष्मी की सवारी बिल्ली: अलक्ष्मी दरिद्रता की अधिष्ठात्री देवी हैं। अलक्ष्मी विष्णु-पत्नी लक्ष्मी की बड़ी बहन है जो ‘अधर्म’ की पत्नी हैं। अलक्ष्मी अर्थात दरिद्रता का निवास इन स्थानों पर होता है गृहक्लेश, झूठ बोलने वाले व्यक्ति, संध्या के समय सोने वाले व्यक्ति, देव का पूजन न होता हो, अतिथियों का सत्कार न होता हो, पितरों का श्राद्ध न किया जाता हो, जुआ खेला जाता हो, स्त्री-पुरुष चरित्रहीन हों और सैदेव पाप कर्म किए जाते हो। शास्त्रों ने अलक्ष्मी को राहू का प्रतीक माना है तथा राहू परम अशुभता का प्रतीक है। अलक्ष्मी सैदेव बिल्ली की सवारी करती हैं। ऐसा देखा जाता है की जहां मास और मदिरा का भक्षण किया जाता है या जहां सनातन संस्कृति के विपरीत आचरण होता है वहां बिल्लियां बहुतायत पाई जाती हैं। कुछ धर्मो में बिल्ली को जिन्नातों के साथ भी जोड़ा जाता है। ऐसा माना माना जाता है जहां बिल्ली निवास करती है वहां जिन्न और प्रेत निवास करते हैं।

बिल्ली को न पालने का ज्योतिष तर्क: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बिल्ली राहू का प्रतीक है। यह सैदेव कबूतरों, चूहों और पक्षियों का शिकार करती है। चूहे तथा पक्षी केतु ग्रह का प्रतीक माने जाते हैं। जिस घर में चूहे यां पक्षियों का शिकार बिल्ली द्वारा किया जाता है वहां राहू का प्रबल और केतु का निर्बल हो जाता है। केतु के निर्बल होने से निम्न समस्याएं उत्तपन्न होती हैं। संतान को कष्ट होना, अधिक व्यय होना, संतानहीनता, अकस्मात दवाइयों पर खर्चा होना, जीवनसाथी से सुख न मिलना, भाग्यहीनता इत्यादि। राहू के प्रबल होने से निम्न समस्याएं उत्पन्न होती हैं। चरित्रहीनता आना, पापकर्म बढ़ना, मास मदिरा का चलन, अकस्मात धन हानि, कोर्टकेस, तंत्रमंत्र की चपेट में व्यक्ति का फंसना। लाल किताब और रावण सहिंता जैसे शास्त्रों में चितकबरे कुत्तों को केतु का प्रतीक माना जाता है। अतः यही कारण है की राहू के प्रतीक बिल्ली से केतु के प्रतीक कुत्ते की जन्मजात शत्रुता है।

शुभ-अशुभ, शकुन-अपशकुन, भाग्य-दुर्भाग्य से परे बिल्ली मूलतः एक जंगली और हिंसक पशु है। बि‍ल्ली को करीब 10 हजार वर्ष पहले अफ्रीकी जंगली बिल्ली से पालतू बनाया गया था। दुनिया की कुछ संस्कृतियों में इसे देवताओं की तरह पूजा जाता है तो कुछ में इन्हें बुराई का प्रतीक माना जाता है। अतः बिल्ली को उसके प्राकृतिक स्थान पर रहने दें। इसे घर में न पालें, उसे मात्र एक सामान्य जीव समझकर उसे सामान्य रूप से विचरण करने दें।

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