
क्या देश में धूप के घंटे कम हो रहे? क्या कोई सूरज की रोशनी चुरा रहा है? इन सवालों के बीच एक रिसर्च सामने आई है, जिसमें खुलासा हुआ कि वाकई ऐसा हो रहा। बादल और प्रदूषण की वजह से भारत में धूप कम हो रही।
क्या भारत की धूप कोई चुरा रहा है? आपको भी ऐसा नहीं लग रहा कि इस बार सूरज बहुत कम नजर आया? पूरे साल जिस तरह से लंबा मॉनसून रहा और लगातार बादल उमड़ते दिखाई दिए, उसी के बाद ये सवाल उठे हैं। लोगों में भी अकसर ये चर्चा सुनने को मिली कि इस बार सूरज मानो गायब ही हो गया है। इस धारणा को पुष्ट करने के लिए आंकड़े भी मौजूद हैं। इस साल लगातार बारिश और बादलों के छाए रहने की वजह से सूरज के दर्शन कम हुए। इसमें प्रदूषण का फैक्टर भी अहम रहा। जानें पूरे मामले पर एक्सपर्ट्स ने क्या कहा।
धूप के घंटे हो रहे कम… क्या बोले साइंटिस्ट – बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, पुणे के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटेरोलॉजी और इंडिया मेटेरोलॉजिकल डिपार्टमेंट के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक रिसर्च की है। इस रिसर्च में पता चला है कि बीते तीन दशकों से भारत के अधिकांश हिस्सों में सूरज की रोशनी यानी धूप के घंटों में लगातार कमी हो रही है। इसकी मुख्य वजह है आसमान में ज्यादा बादल छाए रहना और हवा में प्रदूषण का बढ़ना।
रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा – इस महीने ‘नेचर्स साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ में प्रकाशित एक रिसर्च में 1988 से 2018 के बीच नौ क्षेत्रों के 20 मौसम केंद्रों से धूप के घंटों के आंकड़ों की जांच की गई। पूरी रिसर्च ‘Nature’s Scientific Reports’ में छपी है। वैज्ञानिकों ने 1988 से 2018 तक, नौ अलग-अलग इलाकों के 20 मौसम स्टेशनों से सूरज की रोशनी के समय का डेटा इकट्ठा किया। उन्होंने पाया कि हर जगह सूरज की रोशनी यानी धूप के घंटे का समय कम हुआ है। बस उत्तर-पूर्व भारत में स्थिति एक जैसी रही, लेकिन बाकी सब जगह गिरावट आई है।
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