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ISI का एजेंट भारतीय संसद का निजी सचिव था

800x480_image59662572नई दिल्ली. पाकिस्तान हाईकमीशन से चल रहे जासूसी रैकेट में गिरफ्तार आरोपी फरहत को लेकर चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि फरहत पिछले 20 सालों से ISI को जानकारियां लीक कर रहा था। बता दें कि फरहत राज्यसभा सांसद और सपा नेता चौधरी मुन्नवर सलीम का पीए था। जांच में यह बात भी सामने आई है कि पाक हाईकमीशन का स्टाफर महमूद अख्तर और फरहत एक दूसरे से बात करने के लिए पिज्जा-बर्गर जैसे कोड वर्ड का इस्तेमाल करते थे। फरहत को 10 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया…

– मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ज्वाइंट कमिश्नर (क्राइम) रविंद्र यादव ने कहा, ‘खान पिछले 20 साल से पाक हाई कमीशन में मौजूद ISI हेंडलर्स को जानकारियां लीक कर रहा था।’

– उन्होंने कहा कि फरहत को 10 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया है। जांच अधिकारी उसके दूसरे लिंक और यह जानने की कोशिश करेंगे कि उसने किस तरह के डॉक्यूमेंट्स ISI को दिए हैं।

– वहीं, दूसरी तरफ सांसद मुन्नवर सलीम ने फरहत को बर्खास्त कर देने के बाद कहा कि उन्हें फरहत की ऐसी किसी भी एक्टिविटी की जानकारी नहीं है।

– सलीम ने कहा, ‘अगर जांच एजेंसियों को उनके खिलाफ कोई भी सबूत मिलता है तो वह अपने परिवार के साथ खुदकुशी कर लेंगे।’

क्या था फरहत का मेन काम?

– पुलिस का कहना है कि 1996 के बाद से सलीम चार सांसदों के साथ काम कर चुका है उनमें से कुछ संसदीय कमेटियों के मेंबर भी थे।

– पुलिस का कहना है कि खान का मेन रोल पार्लियामेंट से जुड़े डॉक्यूमेंट्स, कमेटी रिपोर्ट्स और सांसदों से जुड़ी जानकारियां ISI को देना था।

– इस काम के लिए फरहत को 10 हजार से 1 लाख रुपए तक मिल जाते थे। फरहत पाक हाईकमीशन के स्टाफर महमूद अख्तर के संपर्क में था। वह अख्तर से पहले के अफसरों शमशाद और फैयाज के साथ भी काम कर चुका था।

– अख्तर ने पूछताछ के दौरान पुलिस को फरहत के जासूसी रैकेट में शामिल होने की बात कही थी।

बातचीत के लिए कोड वर्ड का इस्तेमाल

-फरहत ने बताया कि वह अख्तर से बात करने के लिए कोड लैंग्वेज का इस्तेमाल करता था।

– मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक फरहत बातचीत के लिए पिज्जा, कॉफी, बर्गर और पेप्सी जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया करता था।

– फरहत ने पुलिस को बताया, ‘अगर उसे दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन के अंसल प्लाजा में मिलना होता था तो वह पिज्जा बोलता था। अगर उसे प्रीत विहार में मिलना होता था तो कॉफी बोलता था। पीतमपुरा में मिलने के लिए बर्गर शब्द का इस्तेमाल किया जाता था। वहीं पेप्सी का मतलब फिर से उसी जगह पर मिलना था जहां पिछली बार मिले थे।’

मामले से जुड़े 6 बड़े डेवलपमेंट

  1. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इस रैकेट का सरगना महमूद अख्तर था जो ढाई साल से पाक हाई कमीशन में तैनात था। वह पाकिस्तान आर्मी की बलूच रेजीमेंट रह चुका है। तीन साल पहले आईएसआई ने उसे रिक्रूट किया था और जासूसी के मकसद से ही उसे भारत भेजा था। उसके पास से फर्जी आधार कार्ड भी मिला है, जो उसने चांदनी चौक के एक ऐड्रेस पर बनवा रखा था।

2.मौलाना और सुभाष के साथ सीक्रेट डॉक्युमेंट्स का लेनदेन करने के लिए 26 अक्टूबर की सुबह 10 बजे अख्तर दिल्ली के चिड़ियाघर में पहुंचा था, जहां से तीनों को पकड़ा गया।
3. हालांकि डिप्लोमेटिक इम्युनिटी के चलते अख्तर को पाक हाई कमीशन के सुपुर्द किया गया। गुरुवार को भारत ने उसे 48 घंटे में देश छोड़ने का अल्टीमेटम दिया। पाकिस्तान का कहना है कि अख्तर पर गलत आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने जासूसी रैकेट में शामिल होने के अख्तर के कबूलनामे की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की है।
4. ये सभी बॉर्डर एरिया में फोर्स मूवमेंट की जानकारी पाकिस्तान तक पहुंचाते थे।

5.पुलिस ने इस मामले में तीसरे आरोपी शोएब की भी गिरफ्तार किया है।

  1. दिल्ली पुलिस के मुताबिक ”शोएब जोधपुर में वीजा एजेंट का काम करता है। उसकी मां और फैमिली के कई मेंबर पाकिस्तान में रहते हैं। दिल्ली में पाक हाई कमीशन के साथ बॉर्डर पार भी उसकी पकड़ मजबूत है। 4 साल से जासूसी में शामिल है और 6 बार पाकिस्तान जा चुका है।” ”शोएब के पास से कुछ खुफिया दस्तावेज और फैबलेट मिला है। जिसे उसने गिरफ्तारी से पहले तोड़ने की कोशिश की थी।”

 

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