Thursday , March 19 2026 2:23 AM
Home / News / जानें क्‍या है ‘अब्राहम गठबंधन’ जिसे ईरान के खिलाफ बनाना चाहते हैं इजरायली पीएम? कहा जा रहा मध्य पूर्व का नाटो

जानें क्‍या है ‘अब्राहम गठबंधन’ जिसे ईरान के खिलाफ बनाना चाहते हैं इजरायली पीएम? कहा जा रहा मध्य पूर्व का नाटो


इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करते हुए ईरान के खिलाफ एक सैन्य गठबंधन की योजना का खाका रखा है। इसमें इजरायल के पड़ोसी मुस्लिम देशों को भी शामिल करने की योजना है। नेतन्याहू की योजना से साफ है कि वे मध्य पूर्व में नाटो जैसा गठबंधन चाह रहे हैं।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मध्य पूर्व में ईरान के खिलाफ एक क्षेत्रीय सैन्य गठबंधन की योजना पेश करके बड़ी आहट का संकेत दिया है। बुधवार को अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ कॉमन्स (प्रतिनिधि सभा) के सदस्यों को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने सैन्य गठबंधन के बारे में बात की। अमेरिकी कांग्रेस में अपना रिकॉर्ड चौथा संबोधन दे रहे नेतन्याहू ने कहा कि सभी देश जो इजरायल के साथ शांति से रह रहे हैं और जो इजरायल के साथ शांति बनाना चाहते हैं, उन्हें ईरान के खिलाफ सैन्य गठबंन में शामिल होना चाहिए। उन्होंने इस गठबंधन के नाम का भी सुझाव दिया और कहा, ‘मेरे पास इस गठबंधन के लिए एक नाम है। मुझे लगता है कि हमें इसे अब्राहम गठबंधन कहना चाहिए।’
मध्य पूर्व में नाटो जैसे गठबंधन – नेतन्याहू ने कहा, ‘हमने अप्रैल में उस गठबंधन की एक झलक देखी थी, जब पांच सेनाओं ने यहूदी राज्य के खिलाफ ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले को मार गिराने के लिए उड़ान भरी थी।’ नेतन्याहू का संदर्भ अप्रैल में ईरान के इजरायल पर हमले से था। इस हमले में इजरायल की तरफ से अमेरिका, ब्रिटेन के साथ ही जॉर्डन और सऊदी अरब की वायु सेनाओं ने ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को गिराने में मदद की थी।
इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि यह नया गठबंधन ऐतिहासिक अब्राहम समझौते का स्वाभाविक विस्तार होगा। नेतन्याहू ने संकेत दिया कि यह गठबंधन मध्य पूर्व का नाटो होगा। उन्होंने कहा, द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ‘अमेरिका ने बढ़ते सोवियत खतरे का मुकाबला करने के लिए यूरोप में एक सुरक्षा गठबंधन बनाया। इसी तरह अमेरिका और इजरायल आज बढ़ते ईरानी खतरे का मुकाबला करने के लिए मध्य पूर्व में एक सुरक्षा गठबंधन बना सकते हैं।
अमेरिका को बताया ईरान का निशाना – नेतन्याहू ने ईरान को सिर्फ इजरायल नहीं, बल्कि अमेरिका के लिए भी खतरा बताया। हिजबुल्ला के एक नेता का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इजरायल के बाद ईरान का निशाना अमेरिका होगा, हम साथ मिलकर अत्याचार के मुकाबले लोकतंत्र की रक्षा कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ईरान अमेरिका को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता है। 1979 में सत्ता पर कब्जा करने के बाद से ही यह वॉशिंगटन से लड़ रहा है। उन्होंने एक पूर्व विदेश मंत्री और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की हत्या के लिए मौत के दस्ते भेजे। हमें हाल ही में पता चला है कि उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप की हत्या करने की भी खुलेआम धमकी दी थी।