
दुनिया में लगातार विकसित होती तकनीक की चलते करोड़ों मील दूर लोग भी आपस में एक-दूसरे के साथ जुड़ रहे हैं। हम दुनिया में किसी भी कोने में बैठे किसी भी शख्स से बात कर सकते हैं, उसे देख सकते हैं। हम सभी अपने परिवार, रिश्तेदार और दोस्तों के साथ भी आसानी से संपर्क कर पाते हैं लेकिन ये स्किके का सिर्फ एक पहलू है। दूसरा पहलू ये है कि तमाम तरह की तकनीकों के बावजूद लोग अकेलेपन का शिकार हो रहे हैं। कई लोग मजबूरी और तो कई अपनी इच्छा के अनुसार खुद को लोगों से दूर कर लेते हैं जो इंसानी प्रकृति के विपरीत है। यही वजह है कि अकेले रहने वाले लोग अवसाद, तनाव, हृदय रोग, डाइमेंशिया जैसी कई तरह की शारीरिक और मानसिक बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। वहीं एक नई रिसर्च में ये बात सामने आई है कि अकेलापन इंसान को समय से पहले बूढ़ा बना देता है और ये सेहत को धूम्रपान से भी ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।
रिसर्च में हुआ ये चौंकाने वाला खुलासा – इस रिसर्च में ये दावा किया गया है कि अकेलापन इंसान को एक साल आठ महीने यानि लगभग दो साल आगे कर देता है जिससे वो हमउम्र लोगों की तुलना में जल्दी बूढ़े होते है और ये धूम्रापन से भी तेजी से उम्र बढ़ाता है। धूम्रापन करने वाले लोगों की उम्र हमउम्र लोगों की तुलना में एक साल तीन महीने जल्दी बढ़ती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि अकेलापन कई अन्य बीमारियों के साथ ही शरीर में सूजन भी बढ़ाता है जिसके परिणामस्वरुप व्यक्ति की अल्जाइमर समेत कई बीमारियों से घिरने की आशंका बढ़ जाती है। भारत में लगभग 50 लाख लोग अकेलेपन का शिकार हैं जिनमें ज्यादातर लोग शहरी इलाकों में रहते हैं। वहीं एक वैश्विक सर्वेक्षण में दावा किया गया कि दुनिया की 33 प्रतिशत आबादी अकेलेपन से पीड़ित है।
अकेलेपन से हेल्थ पर पड़ता है बुरा असर – वैज्ञानिकों की कहना है कि अकेलापन और लोगों से दूरी इंसान का स्वास्ठय खराब करती है। आपको जानकर हैरानी होगी लेकिन कई रिसर्च में सामने आया है कि अकेलेपन से शरीर में सूजन बढ़ती है। दरअसल सूजन तब होती है जब शरीर संक्रमण या कोई चोट लगने पर उससे लड़ने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को रसायनों का उत्पादन करने का सिग्नल देता है और ऐसा तनाव और अवसाद की स्थिति में भी होता है, जिससे शरीर में सूजन हो जाती है।
अमेरिका की हावर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्टडी बताती है कि अमेरिका में एक तिहाई लोग गंभीर रुप से अकेलेपन का शिकार है, जबकि हर साल आठ फीसदी लोग गंभीर स्तर के अवसाद का शिकार होते हैं। इससे उनकी हेल्थ खराब होती है और वो तेजी से बढ़ापे का शिकार होते हैं।
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