
वॉशिंगटन: अमरीका के एक पूर्व शीर्ष सीनेटर ने कहा है कि अमरीका को पाकिस्तान को आतंकवाद का प्रायोजक देश घोषित करना चाहिए। पूर्व रिपब्लिकन सीनेटर लेरी प्रेसलर ने 1990 के दशक में पाकिस्तान पर कड़ी पाबंदियां लगाने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि भारत के साथ संबंधों को बढ़ाने के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले का वह स्वागत करते हैं।
ट्रंप ने अफगानिस्तान और दक्षिण एशिया को लेकर अपनी नई नीति की घोषणा करते हुए अफगानिस्तान में अमरीकी लोगों की हत्या करने वाले आतंकी समूहों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया करवाने को लेकर पाकिस्तान की आलोचना की थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि आतंकियों को पालने पोसने वाले पाकिस्तान को इसके एवज में बहुत कुछ खोना होगा।
दक्षिण एशिया में प्रसिद्ध प्रेसलर संशोधन के लिए पहचाने जाने वाले लेरी प्रेसलर ने कहा कि दक्षिण एशिया संबंधी अपनी नई नीति को लेकर अमरीका भारत के और करीब आ गया और ट्रंप प्रशासन भारत को एक नए स्तर पर ले आया। प्रेसलर ने वर्ष 1990 में लागू किए गए संशोधन की वकालत की थी जब तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश यह प्रमाणित करने में विफल रहे थे कि पाकिस्तान परमाणु हथियार विकसित नहीं कर रहा है।
इस संशोधन ने अमरीका की ओर से पाकिस्तान को दी जाने वाली अधिकांश आर्थिक तथा सैन्य सहायता पर रोक लगा दी थी जब तक कि राष्ट्रपति हर वर्ष यह प्रमाणित नहीं करते कि पाकिस्तान के पास परमाणु विस्फोटक उपकरण नहीं है। प्रसेलर ने मीडिया से कहा,‘‘हमने हमेशा ही भारत और पाकिस्तान के साथ समान व्यवहार किया है। लेकिन सैद्धांतिक रूप से यह पहली बार है जब राष्ट्रपति और विदेश मंत्री ने यह कहा है कि हम भारत के साथ एक नए स्तर पर व्यवहार करेंगे।’’
साऊथ डकोटा से पूर्व रिपब्लिकन सीनेटर 75 वर्षीय प्रेसलर ने कहा,‘‘मेरा खयाल है कि यह भारत के लिए अच्छी खबर है और पाकिस्तान को इसका अहसास होना चाहिए। मैं चाहता हूं कि वह (ट्रंप) उसे आतंकी देश घोषित कर दें लेकिन मुझे नहीं लगता कि वे इतने आगे जाएंगे।’’ उन्होंने यह कहा कि चीन भी पाकिस्तान को उतना नहीं गले लगाएगा जितना की वह कहता है क्योंकि वह जानता है कि पाकिस्तान निहायत ही गैर भरोसेमंद सहयोगी है।
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