
पाकिस्तान सेना प्रमुख ने प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन टीटीपी को कुचलने की धमकी दी है। पिछला साल चरमपंथी हमलों के लिहाज से पाकिस्तान के लिए एक दशक का सबसे बुरा साल रहा है। इस दौरान चरमपंथी हिंसा में सबसे ज्यादा मौतें हुई हैं, जिनमें नागरिक और सैन्य सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।
पाकिस्तान सेना प्रमुख ने टीटीपी को खुली धमकी दी है – इस्लामाबाद: पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन टीटीपी को खुली धमकी है। मुनीर ने कहा कि देश की शांति भंग करने के किसी भी प्रयास को भारी ताकत के साथ कुचला जाएगा। जनरल मुनीर ने पेशावर की यात्रा के दौरान यह टिप्पणी की है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी ने हाल के दिनों में अपने हमलों से पाकिस्तानी सेना को भारी क्षति पहुंचाई है। टीटीपी के हमलों में पाकिस्तानी सेना के कई जवान मारे गए हैं। पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा इलाके में टीटीपी ने अपनी ताकत तेजी से बढ़ाई है।
मुनीर बोले- पीछे नहीं हटेंगे – पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने सोमवार को पेशावर का दौरा किया, जहां उन्होंने खैबर-पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर समेत विभिन्न दलों के राजनीतिक नेताओं से मुलाकात और क्षेत्र में बढ़त चरमपंथी हमलों को लेकर चर्चा की। मुनीर ने कहा, ‘दुश्मन भले ही कलह और भय फैलाने की कोशिश करें, लेकिन हम पीछे नहीं हटेंगे। दुश्मन से सख्ती से निपटा जाएगा। उन्हें भारी नुकसान उठाना जारी रहेगा और नुकसान पहुंचाने की उनकी क्षमता खत्म हो जाएगी।’
इस दौरान उन्हें आतंकवादी समूह फितना अल-ख्वारिज के खिलाफ जारी अभियान के बारे में जानकारी दी है। पाकिस्तान सरकार और सेना टीटीपी को फितना अल-ख्वारिज के नाम से संबोधित करती है। सैन्य ब्रीफिंग के दौरान खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर, पाकिस्तान के गृहमंत्री मोहसिन नकवी और अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी शामिल थे।
साल 2024 पाकिस्तान के लिए सबसे बुरा – साल 2021 में अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद पाकिस्तान के अंदर चरमपंथी हमलों की बाढ़ आ गई है। खैबर-पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के सीमावर्ती प्रांतों में आतंकवादी हमलों में पाकिस्तानी सेना को अपने जवानों की जान गंवानी पड़ी है। पाकिस्तान की सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 पाकिस्तान के नागरिक और सैन्य सुरक्षा बलों के लिए एक दशक में सबसे घातक साबित हुआ है।
सुरक्षा बलों के 685 जवानों की मौत – साल 2024 में पाकिस्तान में 444 आतंकी हमले हुए, जिसमें 685 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई। देश में चरमपंथी हिंसा में कुल 2546 मौतें और 2267 घायल हुए, जिसमें नागरिक, सुरक्षाकर्मी और अपराधी शामिल हैं। 1616 मौतों के साथ खैबर पख्तूनख्वा मानवीय नुकसान में सबसे ऊपर था। उसके बाद बलूचिस्तान में 782 मौतें हुईं।
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