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पैरेंटिंग का मतलब सिर्फ बच्‍चे को पालना ही नहीं है बल्कि बढ़ती उम्र में उसके अंदर से नेगेटिविटी को निकालना भी है


बच्‍चे बहुत मासूम होते हैं और उनका मन बहुत नाजुक होता है। बच्‍चों की भावनाओं को समझना और उनके जीवन के हर पहलू पर ध्‍यान देना बहुत जरूरी होता है। अगर आपका बच्‍चा डरपोक है, तो इस आदत या प्रवृत्ति को छोड़ने या इससे उभरने में उसकी मदद करें। पैरेंटिंग का मतलब सिर्फ बच्‍चे को पालना ही नहीं है बल्कि बढ़ती उम्र में उसके अंदर से नेगेटिविटी को निकालना भी है।
जब बच्‍चा अपने आसपास की चीजों, माहौल या लोगों से जुड़ने लगता है, तो उसमें इन्‍हें खोने का डर भी पैदा होता है। अपनी किसी प्‍यारी चीज के खोने या उसे नुकसान पहुंचने का डर बच्‍चे के मन में बैठ सकता है। बच्‍चों को भूतों से भी बहुत डर लगता है। उनके मन में ख्‍याल आते हैं कि उनके बेड पर कोई बैठा है या अंधेरे में बाथरूम जाने में कतराते हैं। जब भी वो किसी आदमी को बड़े बैग के साथ देखते हैं तो उन्‍हें लगता है कि वो उन्‍हें किडनैप कर लेगा।
ऐसी कई चीजें हैं जो बच्‍चे को डरपोक बना सकती हैं जिसमें सबसे अहम और स्‍पष्‍ट है माहौल। अगर बच्‍चा ऐसे लोगों के बीच रहता है जहां बातचीत से ज्‍यादा बहस होती है, तो बच्‍चा डर जाता है।
यह भी देखा गया है कि यदि माता-पिता में से कोई एक डर के प्रति संवेदनशील है, तो बच्चे में इसके विकसित होने की संभावना होती है। अपने माता-पिता को चिंतित देखकर बच्चे इस आदत को आसानी से अपनाने के लिए प्रेरित होते हैं।
​बन सकती है आफत : यदि बच्‍चे के डर पर ध्‍यान ना दिया जाए तो यह एक बड़ी परेशानी बन सकती है और जब बच्‍चा खुद अपनी जिंदगी जीने लगता है या बड़ा हो जाता है तो उसे कई चीजों में दिक्‍कतों का सामना करना पड़ सकता है।
डर के बारे में बात करें : अगर आपको लग रहा है कि कुछ चीज आपके बच्‍चे को डरा रही है तो उससे इसके बारे में बात करने की कोशिश करें। उससे पूछें कि क्‍या हिस्‍सा उसे सबसे ज्‍यादा डराता है। उससे फोबिया के बारे में बात करें ताकि आप ये जान सकें कि उसे और किन चीजों से डर लगता है।
डर का सामना करना सिखाएं : बच्‍चे को सिखाएं कि डर लगना एक नॉर्मल चीज है और आप इसे रोक नहीं सकते हैं लेकिन लड़ सकते हैं। अपने दिमाग में चल रही चीजों और विचारों को हटाकर यह समझें कि ये सब चीजें आपके दिमाग में हैं असल में नहीं।
डर को इग्‍नोर ना करें : जब बच्‍चा आपको अपने डर के बारे में बताता है तो उस पर हंसे नहीं। बच्‍चे को इससे श‍र्मिंदगी महसूस हो सकती है। वो ऐसी किसी भी सिचएुशन में नहीं आना चाहेंगे जहां उन पर हंसा जाए या ताना मारा जाए। ऐसे बच्‍चों के साथ पैरेंट्स को थोड़ा धैर्य रखना चाहिए।

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