
क्या आप एक ऐसे फिल्म सेट की कल्पना कर सकते हैं, जहां न लाइटमैन की भाग दौड़ हो और न ही लाइट-कैमरा-एक्शन की आवाज। AI के समय में यह हकीकत बन चुका है। दरअसल दुनिया में सबसे ज्यादा फिल्में बनाने वाली भारतीय फिल्म इंडस्ट्री आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। आपको जानकर हैरानी होगी कि बेंगलुरु के स्टूडियोज में अब असली सुपरस्टार्स की जगह डिजिटल एक्टर्स तैयार किए जा रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार,(REF.) AI की मदद से रामायण और महाभारत जैसे पौराणिक महाकाव्यों को पर्दे पर उतारा जा रहा है। हालांकि हॉलीवुड का रवैया AI के प्रति बॉलीवुड जैसा सकारात्मक नहीं रहा है। वहां इसे कला के खिलाफ माना जाता है, जबकि भारतीय स्टूडियोज इसे हाथों-हाथ ले रहे हैं।
लागत में कटौती के चलते हो रहा बदलाव? – AI ने फिल्म निर्माण के अर्थशास्त्र को पूरी तरह से बदल दिया है। रिपोर्ट्स की मानें, तो AI की वजह से पौराणिक और फैंटेसी फिल्मों की निर्माण लागत अब पहले के मुकाबले पांचवे हिस्से तक गिर चुकी है। गौर करने वाली बात है कि रिलायंस और डिज्नी जैसे बड़े खिलाड़ी पहले ही AI-जनरेटेड महाभारत सीरीज पेश कर चुके हैं। ये सीरीज करोड़ों व्यूज बटोरने में भी कामियाब रही है।
यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि करोड़ो व्यूज बटोरने के बावजूद AI से बनी सीरीज की क्वीलिटी और लिप-सिंक को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इतना तय है कि यह स्टूडियोज के लिए मुनाफा कमाने का नया जरिया बन गया है।
AI से स्टूडियो कर रहे प्रयोग – AI की वजह से भारतीय स्टूडियोज एक अनोखा प्रयोग कर रहे हैं। दरअसल वे पुरानी फिल्मों का अंत AI से बदल रहे हैं। हाल ही में फिल्म रांझणा को एक हैप्पी एंडिंग के साथ दोबारा पेश किया गया था, जिसे लेकर काफी विवाद हुआ था। फिल्म के मुख्य अभिनेता धनुष ने इसे ‘कला की आत्मा का हनन’ बताया था।
रिपोर्ट के अनुसार इरोस इंटरनेशनल जैसी कंपनियां अब अपनी 3,000 फिल्मों की लाइब्रेरी को खंगाल रही हैं, ताकि उन्हें AI के जरिए नया रूप देकर दोबारा पैसा कमाया जा सके। यह हॉलीवुड से बिल्कुल अलग है, जहां सख्त नियमों के कारण ऐसा करना फिलहाल मुश्किल है।
फिल्म इंडस्ट्री को बदल रहा AI – AI भारत में डबिंग के तौर-तरीके भी बदल रहा है। यहां 22 आधिकारिक भाषाएं हैं, जिनके लिए डबिंग हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। AI की मदद से किसी के चेहरे के हाव-भाव और होंठों की हलचल को किसी भी भाषा के अनुसार बदला जा सकता है।
यशराज फिल्म्स जैसी बड़ी कंपनियां वॉर 2 जैसी फिल्मों में इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही हैं। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और एनवीडिया जैसे टेक दिग्गज भी भारतीय फिल्म निर्माताओं के साथ हाथ मिला रहे हैं। जहां हॉलीवुड में AI के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए, वहीं भारत में निर्देशक अनुराग कश्यप जैसे लोग मानते हैं कि यहां सिनेमा सिर्फ कला नहीं, बल्कि एक बिजनेस है और जनता नए प्रयोगों को पसंद कर रही है।
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