
बीजिंगः चीन के असंतुष्ट कार्यकर्त्ता नोबेल पुरस्कार विजेता लियू शियाओबो की विधवा लियू शिया को चीन में 8 साल तक नजरबंद रखे जाने के बाद रिहा कर दिया गया है। वह अब जर्मनी पहुंच गई हैं। लियू शियाओबो को जब वर्ष 2010 का नोबेल शांति पुरस्कार मिला था, तब से 57 वर्षीय कवयित्री को नजरबंद रखा गया है जबकि उन पर कोई आरोप नहीं हैं। उन्हें किसी तरह की गतिविधि करने को लेकर मनाही थी और कई कठोर प्रतिबंध लगाए गए थे।
चीन से बाहर जाने की अनुमति मिलने के बाद लियू ने हेलसिंकी होते हुए बर्लिन के लिएउड़ान भरी थी। बर्लिन के असंतुष्ट लियाओ यीवू और जर्मनी की नोबेल पुरस्कार विजेता हर्टा म्यूलर सहित कई लोग हवाईअड्डे पर उनके स्वागत के लिये मौजूद थे और जैसे ही वह विमान से उतरीं, लोगों ने उनके नाम के नारे लगाने शुरू कर दिए। लेकिन लियू इसके तुरंत बाद एक काली गाड़ी में सवार हुईं और बिना कोई टिप्पणी किए वहां से रवाना हो गईं।
लियाओ ने इससे पहले ट्विटर पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा- मैं बहुत, बहुत, बहुत खुश हूं! आखिरकार शिया आज लौट रही हैं!! उनके पति लियू शियाओबो 1989 के तियानआनमान चौराहे पर हुए प्रदर्शन के नेता थे। राष्ट्रविरोधी कार्रवाई के आरोप में 11 साल जेल की सजा काट रहे शियाओबो का पिछले साल कैंसर से निधन हो गया था।
IndianZ Xpress NZ's first and only Hindi news website