
जेनेवा | स्विट्जरलैंड में रविवार को यूनिवर्सल बेसिक इनकम प्रस्ताव पर वोटिंग होनी है, जिसमें कहा गया है कि देश के हर नागरिक को समान रूप से 2300 डॉलर यानी करीब 1.54 लाख रुपए सरकार की ओर से हर माह दिए जाएं। दलील है कि इससे लोगों को गरीबी तथा असमानता से लड़ने में मदद मिलेगी। दुनिया में अपने तरह का यह पहला प्रस्ताव है।
हालिया सर्वे के की मानें तो यह विचार विवादास्पद है, लेकिन कुछ लोगों द्वारा इसके समर्थन में जबरदस्त अभियान चलाया जा रहा है। वहीं , तमाम राजनीतिक दल विरोध भी कर रहे हैं। सरकार लोगों से अपील कर रही है कि वो इस प्रस्ताव को ठुकरा दें।
यूनिवर्सल बेसिक इनकम के समर्थकों को उम्मीद है कि जनता पक्ष में वोटिंग करेगी। प्रस्ताव पास हो गया तो सभी स्विस नागरिकों के साथ ही पांच साल से वहां रह रहे विदेशियों को भी यह राशि मिलेगी। प्रस्ताव के समर्थक तो ड्रा के जरिए चुने गए लोगों को एसएमएस भी भेजने लगे हैं। ज्यूरिख की एक वैज्ञानिक कैरोल को फोन पर ऐसा ही ड्रीम मैसेज मिला जिसमें कहा गया कि वह अगले हर महीने में 2300 डॉलर हासिल करेंगी।
वहीं, आलोचकों ने इसे ‘मार्क्सवादी सपना’ करार दे रहे हैं। जिनेवा ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट के इकोनॉमिक्स प्रोफेसर चार्ल्स के मुताबिक बिना कुछ किए अगर लोगों की आय होगी तो लोग नौकरियां छोड़कर घर बैठ जाएंगे।
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