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बच्‍चे के साथ डांट-डपट करने वाले पैरेंट्स नहीं होते सही, सीधा मेंटल हेल्‍थ पर करते हैं वार

अथॉरिटेरियन पैरेंटिंग बच्‍चों की परवरिश करने का ऐसा तरीका है जिसमें माता-पिता काफी स्ट्रिक्‍ट पेश आते हैं। ये माता-पिता अनुशासन और आज्ञाकारिता पर अधिक ध्यान केंद्रित करते हैं। यह ज्यादातर उनके बच्चे के जीवन पर कंट्रोल करके और बच्चे को बहुत कम स्वतंत्रता की इजाजत देता है। जब उनके बच्चे गलतियां करते हैं, जो हर बच्चा जल्दी या बाद में करता है, अथॉरिटेरियन माता-पिता अपने बच्‍चे को माफ करने का मन कम रखते हैं और जवाब में उसे सजा देते हैं।
ल्यूवेन विश्वविद्यालय के एक नए अध्ययन से पता चलता है कि अथॉरिटेरियन पैरेंटिंग बच्‍चे के किशोर और वयस्‍क होने पर उसमें अवसाद और अन्य मानसिक बीमारियों को जन्म दे सकती है।
क्‍या कहती है स्‍टडी – इस अध्ययन में 21 किशोरों को शामिल किया गया जिनसे गुड पैरेंटिंग को बयां करने के बारे में पूछा गया। इसमें सपोर्ट और चाइल्‍ड ऑटोनॉमी शामिल है। इन विषयों की तुलना 23 किशोरों से की गई, जिन्होंने “अथॉरिटेरियन पैरेंटिंग” को झेला था। इसमें अन्य बातों के अलावा मैनिपुलेटिव व्यवहार शामिल है। अध्ययन में शामिल सभी प्रतिभागियों की उम्र 12-16 वर्ष के बीच थी।
​रिसर्च में क्‍या पाया गया – जीनोम मैपिंग का उपयोग करके, शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन 23 किशोरों ने स्ट्रिक्‍ट पैरेंटिंग की सूचना दी थी, उनमें मिथाइलेशन में भिन्नता बढ़ गई थी। मिथाइलेशन कुछ जीनों को चालू और बंद करने की कुंजी है। इससे पता चलता है कि अथॉरिटेरियन पैरेंटिंग उनमें अवसाद के साथ-साथ अन्य मानसिक बीमारियों के बढ़ते जोखिम का कारण हो सकता है।
​आइडेंटिकल ट्विंस में था खतरा – यह स्‍टडी आइडेंटिकल ट्विंस की अप्रोच पर आधारित थी। दो इंडिपेंडेंट ग्रुपों में पाया गया कि ट्विन डायग्‍नोज के साथ मेजर डिप्रेशन में डीएनए मिथाइलेशन की हाई रेंज की प्रमुखता पाई गई। यह स्‍वस्‍थ जुड़वां बच्‍चों की तुलना में था।
जिन बच्‍चों ने स्ट्रिक्‍ट पैरेंटिंग की बात कही, उनमें डिप्रेशन की संभावना अधिक थी।