
पाकिस्तान इस्लाम के नाम पर बना। अल्पसंख्यकों का हाल यहां क्या है इसे लेकर समय-समय पर रिपोर्ट आती रहती हैं। हिंदू लड़कियों का अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन कोई नई बात नहीं है। लेकिन इसी पाकिस्तान में एक ऐसी जगह है, जहां पर हिंदू मुस्लिम भाईचारा भी देखा जाता है। भाईचारे का आलम ये है कि पाकिस्तान के मुस्लिम यहां बकरीद पर गायों की कुर्बानी भी नहीं देते हैं। पाकिस्तान के सिंध प्रांत में थार ऐसी जगह है, जहां हिंदु मुस्लिम साथ-साथ रहते हैं। थार का जिला हेडक्वार्टर मीठी है, जो कराची से 6 घंटे की दूरी पर है। इस इलाके में गायों की सेवा हिंदू-मुस्लिम साथ करते हैं।
पाकिस्तान में बकरीद के मौके पर हाल ही में 290,000 से ज्यादा गायों की कुर्बानी दी गई। इसके अलावा कुर्बानी देने वाले जानवरों में 330,000 बकरियां, 385,000 भेड़, 98000 ऊंट और 165000 भैंस शामिल हैं। लेकिन मीठी शहर गायों की सेवा में लगा रहा। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक मीठी टीलों के बीच स्थित है। मीठी में गौशाला भी हैं, जहां बीमार और लावारिस गायों को रेसक्यू किया जाता है। गौ आश्रम के मैनेजर सामन दास सोठार ने कहा कि हमें बेजुबानों के लिए कुछ करने की जरूरत है।
लोगों को देते हैं गाय-बैल – उन्होंने कहा, ‘ये बेजुबान हैं। इनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है। ये कहीं भी पड़े होते हैं, इसलिए भगवान ने हमारे दिल में ये विचार पैदा किया कि हम इनके लिए कुछ कर पाए। भगवान मुझे और भी हिम्मत देगा। हमारे हिंदू और मुस्लिम भाई इस काम को मिलकर बढ़ाएं।’ थार में सदियों से हिंदू और मुस्लिम साथ रहते हैं। अगर इलाके के किसी व्यक्ति को गाय या बैल की जरूरत पड़ती है तो यहां की गौशाला उसे देती है।
गाय का गोश्त नहीं बिकता – थार में कभी हिंदुओं तो कभी मुस्लिमों की सरकार रही हैं। ईद से लेकर होली तक यहां लोग साथ मनाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक शहर में मौजूद दर्जन भर से ज्यादा दरगाहों के प्रबंधक हिंदू हैं। वहीं यहां न तो गाय की कुर्बानी होती है और न ही गाय का गोश्त बेचा जाता है। रहीम खान नाम के एक स्थानीय शख्स ने बताया कि उसने कुछ दिनों के लिए गौशाला से गाय ली थी। उसे खेती के कामों के लिए इनकी जरूरत थी। जब वह गाय लेने गया तो उसका धर्म नहीं पूछा गया।
Home / News / पाकिस्तान की वो जगह जहां बकरीद पर भी नहीं होती गायों की कुर्बानी, लाखों जानवर काटने वाले देश में यहां है हिंदू-मुस्लिम भाईचारा
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