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घर में रखी इन चीजों में है कैंसर, इसके कारण वक्त से पहले मर रहे लोग, रहें बचकर


दौर बदल रहा है, लेकिन बदलते वक्त में कैंसर जैसी बीमारी दुनिया भर में लगातार बढ़ती नजर आ रही है। आमतौर पर लोगों का मानना होता है कि धूम्रपान, शराब और तंबाकू जैसी चीजों के सेवन से कैंसर की बीमारी होती है। लेकिन इसके अलावा आज ऐसी बहुत सी चीजें हैं जिनके प्रयोग से कैंसर की समस्या होने का खतरा बढ़ रहा है। विश्व कैंसर दिवस 4 फरवरी 2024 पर इस बारे में हमने तमाम डॉक्टर्स से बात की।
कैंसर को लेकर लोगों में जागरूकता उत्पन्न हो सके, इसीलिए विश्व में हर साल वर्ल्ड कैंसर डे 4 फरवरी को मनाया जाता है। वर्ल्ड कैंसर रिसर्च फंड इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट के अनुसार 2020 में दुनिया भर में 18.1 मिलियन कैंसर के मामले थे। इनमें से 9.3 मिलियन मामले पुरुषों में और 8.8 मिलियन महिलाएं थीं। वहीं नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार 2020 की तुलना में 2025 में कैंसर के मामलों में 12.8 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है।
दुनिया तेजी से बदल रही है और युवाओं के शौक भी उसके मुताबिक बढ़ रहे हैं। लेकिन कई ऐसे शौक हैं, जो कैंसर के मामले बढ़ाने की वजह बन रहे हैं। इस बारे में गुरुग्राम स्थित नारायणा हॉस्पिटल कंसलटेंट एंड डायरेक्टर (मेडिकल ऑनकोलॉजी) डॉ. रणदीप सिंह बताते हैं, ‘धूम्रपान और शराब के सेवन के साथ-साथ आजकल सिगरेट की लत छुड़ाने के लिए मार्केट में आई ई-सिगरेट जो युवा वर्ग में काफी लोकप्रिय हो रही है, यह सभी कैंसर के खतरे को तेजी से बढ़ा रहे हैं।
इसमें प्रयोग होने वाले कैमिकल काफी खतरनाक हैं, जैसे निकोटिन, फॉर्मेल्डिहाइड, टिन, निकिल, कॉपर, लेड, क्रोमियम, आर्सेनिक एवं डाई एसेटाइल मेटल जैसे पदार्थ क्वाइल में मिले होते हैं। दरअसल ई-सिगरेट के वेपर को गर्म करने के लिए क्वाइल का इस्तेमाल होता है और इनसे लंग्स कैंसर का खतरा तेजी से बढ़ा है।
ई सिगरेट और हुक्का में मौजूद केमिकल – इसके अलावा युवा वर्ग में हुक्का पीने का भी चलन तेजी से बढ़ा है, जिसमें कई खतरनाक केमिकल मिलकर फ्लेवर बन रहे हैं। चाहे वह ई सिगरेट हो या फिर फ्लेवर्ड हुक्का दोनों में खतरनाक केमिकल डाई एसिटाइल मिला होता है जो आपकी सेहत के लिए घातक है। इनमें कुछ अन्य प्रकार के हानिकारक केमिकल भी जैसे कार्बन मोनोआक्साइड, कैडमियम, अमोनिया, रे-डॉन (खतरनाक न्यूक्लियर गैस), मिथेन, टॉर (चारकोल), एसिटोन आदि मिले होते हैं जो कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं।
घर में इन चीजों का प्रयोग बढ़ा सकता है परेशानी – आज हर चीज एडवांस हो रही है, चाहे वो घरों में इस्तेमाल होने वाली कोई चीज ही क्यों ना हो। इस बारे में एक्शन कैंसर हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट ( मेडिकल ऑनकोलॉजी) डॉ. जेबी शर्मा बताते हैं, ‘घरों में इस्तेमाल होने वाली ऐसे कई चीजें हैं जिनसे कैंसर के खतरे की संभावना बढ़ रही है। जैसे प्लास्टिक की बोतल में रखा पानी पीना खतरनाक हो सकता है क्योंकि इसमें माइक्रो प्लास्टिक पाए जाते हैं, ठीक इसी प्रकार से लोग आजकल प्लास्टिक की थैली में पैक गर्म चाय लेकर पीते हैं, जबकि इसमें भी माइक्रो प्लास्टिक होता है जिसकी आपके शरीर में जाने की संभावना होती है।
टी बैग, प्लास्टिक के बर्तन, मेयोनीज – वहीं आजकल टी बैग के इस्तेमाल के कारण भी कैंसर होने की संभावना बनी रहती है, दरअसल इसमें एपिक्लोरो हाइड्रिन नामक एक रसायन होता है, जो गर्म पानी में घुल जाता है और आगे कैंसर का कारण बन सकता है। इसलिए इनके इस्तेमाल से बचें।’ तकनीक के इस्तेमाल से भी कैंसर का खतरा बढ़ रहा है। डॉक्टर जेबी शर्मा बताते हैं, ‘जैसे यदि आप ओवन में खाना गर्म करके खाते हैं, तो प्लास्टिक के बर्तनों आदि का इस्तेमाल न करें क्योंकि प्लास्टिक से एंडोक्रिन डिस्ट्रक्टिंग नामक खतरनाक केमिकल निकलता है, जो खाने के साथ घुलकर शरीर में चला जाता है और कैंसर की संभावना को बढ़ाता है।
इसके अलावा नॉनस्टिक बर्तन में खाना जल जाए तो एकदम न खाएं क्योंकि इसमें एक्रिलामाइड नाम का केमिकल बनने लगता है और ये कैंसर का कारण बनता है। वहीं सफेद रंग की मेयोनीज में फूड एडिटिव की वजह से कोलोरेक्टल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।’
ब्यूटी प्रॉडक्ट प्रयोग करें लेकिन ध्यान से – ब्यूटी प्रॉडक्ट इंडस्ट्री जितना तेजी से ग्रो कर रही है, नए-नए ब्यूटी प्रॉडक्ट उतनी तेजी से कैंसर के खतरे को बढ़ा रहे हैं। इस बारे में धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के सीनियर कंसलटेंट (मेडिकल ऑनकोलॉजी) डॉ. राजित चानना बताते हैं, ‘ब्यूटी प्रोडक्ट्स में आजकल बालों को सिल्की करने और चिकना करने के लिए कई प्रकार के केमिकल युक्त उत्पादों का प्रयोग किया जाता है, जिसमें फॉर्मेल्डिहाइड और फॉर्मेल्डिहाइड-रिलीजिंग जैसे रसायनों पर एफडीए का प्रतिबंध है।
इस प्रकार के प्रोडक्ट का इस्तेमाल कैंसर के खतरे को बढ़ाता है। बालों को सीधा करने वाले इस प्रकार के कुछ उत्पादों के प्रयोग से अल्पकालीन और दीर्घकालीन गंभीर समस्याएं होने की संभावना बनी रहती है। स्ट्रेटनर में पाए जाने वाले कई रसायन जैसे पैराबेंस, बिस्फेनॉल ए, मेटल और फॉर्मेल्डिहाइड बहुत ही खतरनाक होते हैं और इसे कैंसर होने की संभावना बनी रहती है।
नेल पॉलिश से भी कैंसर – फॉर्मेल्डिहाइड धुएं के संपर्क में आने से आंख, नाक और गले में जलन हो सकती है, साथ ही श्वसन समस्याएं भी हो सकती हैं और आगे चलकर कैंसर का भी जोखिम बढ़ जाता है। इसको लेकर 2022 के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान द्वारा अध्ययन से भी कई संकेत मिलते हैं, जिनमें इन रसायनों के धुएं से महिलाओं में गर्भाशय कैंसर की अधिक संभावना को बताया गया है। इसके अलावा नेल पॉलिश और नेल पेंट रिमूवर जैसे सौंदर्य उत्पादों में टोल्यूनि, फॉर्मेल्डिहाइड, एसीटोन जैसे रसायन पाए जाते हैं जो बहुत जहरीले होते हैं और इस कारण कैंसर होने की संभावना बनी रहती है।