
कचिन क्षेत्र के चिपवी और पंगवा इलाके में सबसे ज्यादा दुर्लभ खनिज हैं और ये दोनों ही क्षेत्र चीन की सीमा के काफी करीब हैं। इसीलिए 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद कचिन का ‘वॉर इकॉनमी’ काफी तेजी से बढ़ा है। चिप्वी, पांगवा और चीनी सीमा से सटे कई इलाकों में खनन गतिविधियां पांच गुना तक बढ़ चुकी हैं। चीन अभी सबसे बड़ा खिलाड़ी है।
दुनिया में दुर्लभ खनिज धातुओें के लिए शक्तिशाली देशों के बीच जबरदस्त जियो पॉलिटिकल जंग चल रही है। दुनिया के कई हिस्सों में सुपरपावर्स टकरा रहे हैं। भारत का पड़ोसी देश म्यांमार, जो राजनीतिक उथल पुथल और सैन्य शासन से जूझ रहा है, वो भी अब जंग का नया अखाड़ा बन गया है। म्यांमार में कुछ बेहद महत्वपूर्ण रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE), डिस्प्रोसियम, टर्बियम और दूसरे जो विंड टर्बाइन, इलेक्ट्रिक गाड़ियों और एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम में मैग्नेट के लिए जरूरी हैं, बहुत ज्यादा रणनीतिक महत्व के जियोपॉलिटिकल हॉटस्पॉट बन गए हैं।
म्यांमार, चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा दुर्लभ खनिज का प्रोड्यूसर बन गया है। 2024 में इसका कुल प्रोडक्शन करीब 31,000 मीट्रिक टन होने का अनुमान है, जो 2022 के लगभग 12,000 मीट्रिक टन से काफी ज्यादा है। म्यांमार के कचिन राज्य में सबसे ज्यादा दुर्लभ खनिज संपदा है, इसलिए ये सबसे ज्यादा चर्चा में है। ये क्षेत्र दशकों पुराने संघर्ष, सैन्य शासन और जातीय सशस्त्र समूहों के बीच सत्ता-संघर्ष में फंसा हुआ है। यही वह क्षेत्र है, जहां अमेरिका भी अब एंट्री के लिए हाथ पैर मार रहा है। अमेरिका इस क्षेत्र में अपना प्रभुत्व जमाने के लिए म्यांमार की सेना के साथ साथ इस क्षेत्र के प्रमुख विद्रोही गुट कचिन इंडिपेंडेंस आर्मी (KIA) से सीधे डील करने की कोशिश कर रहा है, ताकि इस क्षेत्र के प्रमुख खनन इलाकों पर नियंत्रण किया जा सके।
Home / News / म्यांमार के पहाड़ों में छिपे दुर्लभ खजाने पर कब्जे के लिए 3 देशों में ‘जंग’, चीन का पैर उखाड़ने पहुंचे भारत-अमेरिका, किसकी होगी जीत?
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