
आर्मेनिया और अजरबैजान के नेताओं ने संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में मुलाकात की है। यह मई के बाद दोनों नेताओं की पहली मुलाकात थी। आर्मेनिया और अजरबैजान में लगभग चार दशक पुरानी दुश्मनी है। दोनों देश जमीन के एक बड़े भू-भाग पर अपना अधिकार जमाते हैं।
लगभग चार दशकों के संघर्ष के बाद आर्मेनिया और अज़रबैजान के नेताओं ने संयुक्त अरब अमीरात में शांति वार्ता की। इस शांति वार्ता में आर्मेनियाई प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान और अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव शामिल हुए। हालांकि, अभी तक इस बातचीत में शांति समझौते को लेकर कोई आपेक्षित सफलता नहीं मिली है। गुरुवार को अबू धाबी में हुई बैठक दोनों देशों द्वारा मार्च में शांति समझौते के मसौदे को अंतिम रूप देने के बाद हुई है। दोनों देश नागोर्नो-काराबाख को लेकर कई बार युद्ध लड़ चुके हैं। अब इस भूभाग पर अजरबैजान का कब्जा है।
दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों से अलग-अलग जारी अंतिम बयान में किसी ठोस प्रगति का कोई संकेत नहीं दिया गया। इनमें कहा गया था कि दोनों नेता “दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता और विश्वास-निर्माण उपायों को जारी रखने पर सहमत हुए।” इसमें आगे कहा गया है, “यह पुष्टि की गई कि द्विपक्षीय वार्ता सामान्यीकरण प्रक्रिया से संबंधित सभी मुद्दों को हल करने के लिए सबसे कुशल प्रारूप का प्रतिनिधित्व करती है, और इस आधार पर, इस तरह की परिणाम-उन्मुख बातचीत जारी रखने और साझा सीमा के परिसीमन पर सहमति हुई।”
अजरबैजान ने नागोर्नो-काराबाख पर किया कब्जा – आर्मेनिया और अजरबैजान नागोर्नो-काराबाख को लेकर कई बार युद्ध लड़ चुके हैं। इस इलाके में ज्यादातर अर्मेनिया जातीय लोग रहते थे, जिन्होंने खुद को अजरबैजान से अलग कर लिया था। हालांकि, अजबैजान ने सितंबर 2023 में हमला कर नागोर्नो-काराबाख पर फिर से कब्जा कर लिया। इस कारण नागोर्नो-काराबाख के लगभग सभी 1,00,000 जातीय अर्मेनियाई लोगों को आर्मेनिया भागना पड़ा था। इस युद्ध के बाद ही दोनों देश शांति वार्ता के लिए तैयार हुए थे। लेकिन समझौते पर पहुंचने की समय-सीमा अनिश्चित बनी हुई है।
आर्मेनिया-अजरबैजान सीमा पर तनाव – आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच शांति के लिए मसौदा समझौते की घोषणा के तुरंत बाद भारी सैन्य सुरक्षा वाली 1,000 किलोमीटर (620 मील) लंबी साझा सीमा पर संघर्ष विराम उल्लंघन की घटनाओं में बढ़ोत्तरी देखी गई थ। हालांकि, हाल ही में किसी उल्लंघन की कोई सूचना नहीं मिली है। समझौते में एक बड़ी बाधा यह बनी हुई है कि अजरबैजान आर्मेनिया से अपने संविधान में बदलाव की मांग कर रहा है, जिसके बारे में उसका कहना है कि यह अजरबैजान के क्षेत्र पर अप्रत्यक्ष दावा करता है।
आर्मेनिया से परिवहन गलियारा मांग रहा अजरबैजान – आर्मेनिया ने इससे इनकार किया है। लेकिन, आर्मेनियाई प्रधानमं पशिनयान ने हाल के महीनों में, खासकर इस हफ्ते, बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि उनके देश के संस्थापक चार्टर को अपडेट करने की जरूरत है। अज़रबैजान ने आर्मेनिया से होकर एक परिवहन गलियारे की भी मांग की है ताकि उसके ज्यादातर भूभाग को नखचिवन से जोड़ा जा सके, जो बाकू के सहयोगी तुर्की की सीमा से लगा एक अजरबैजानी क्षेत्र है।
आखिरी बार मई में मिले थे पशिनयान और अलीयेव – पशिनयान और अलीयेव की आखिरी मुलाकात मई में अल्बानिया के तिराना में यूरोपीय राजनीतिक समुदाय शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। जून में, पशिनयान ने तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के साथ बातचीत करने के लिए इस्तांबुल की यात्रा भी की थी। इस यात्रा को आर्मेनिया ने क्षेत्रीय शांति की दिशा में एक “ऐतिहासिक” कदम बताया था। उधर, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दोनों पड़ोसियों के बीच शीघ्र शांति समझौते की आशा व्यक्त की है।
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