
5 मार्च अन्नपूर्णा अष्टमी से होलाष्टक का आरम्भ हो रहा है, जो 12 मार्च तक चलेगा। इन 8 दिनों में मन में उल्लास लाने और वातावरण को जीवंत बनाने के लिए लाल या गुलाबी रंग का प्रयोग विभिन्न तरीकों से किया जाता है। लाल परिधान मूड को गरमा देते हैं यानी लाल रंग मन में उत्साह उत्पन्न करता है। इसीलिए उत्तर प्रदेश में आज भी होली का पर्व एक दिन नहीं अपितु 8 दिन मनाया जाता है। भगवान कृष्ण भी इन 8 दिनों में गोपियों संग होली खेलते रहे और अंतत: होली में रंगे लाल वस्त्रों को अग्नि को समर्पित कर दिया। इसलिए होली मनोभावों की अभिव्यक्ति का पर्व है जिसमें वैज्ञानिक महत्ता है, ज्योतिषीय गणना है, उल्लास है, पौराणिक इतिहास है, भारत की सुंदर संस्कृति है जब सब अपने भेदभाव मिटा कर एक हो जाते हैं।
होलाष्टक में क्या न करें : होलाष्टक शुरू होने पर अर्थात 5 से 12 मार्च तक कोई भी शुभ एवं मंगलकारी कार्य नहीं करने चाहिए, अर्थात, कोई भी विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, किसी भवन का शिलान्यास, नया बिजनैस, नया वाहन अथवा किसी प्रकार की नई वस्तु की खरीदारी आदि करना तथा कोई शुभ एवं मांगलिक कार्य करना निषिद्ध माना जाता है।
क्या करें- होलाष्टक के दिनों में भगवान विष्णु एवं भगवान के नरसिंह स्वरूप का पूजन विधिवत करना चाहिए, विष्णु सहस्त्रनाम और नरसिंह स्रोत का पाठ करना अधिक उत्तम है। इन दिनों में अपने कमजोर ग्रहों को शक्तिशाली बनाने के लिए विभिन्न रंगों की वस्तुओं से पूजन करना शुभफलदायक है। भगवान सूर्य के पूजन में कुमकुम, चन्द्रमा के लिए अवीर, मंगल के लिए चंदन एवं सिंदूर, बुध के लिए मेहंदी, बृहस्पति के लिए पीला केसर, पीला रंग अथवा हल्दी, शुक्र के लिए सफेद चंदन, माखन, मिश्री, दूध एवं दही, शनि के लिए नीले और काले रंग, राहु और केतू के लिए काले तिलों से पूजन करना चाहिए।
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