
भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में रहने वाले 5800 बेनी मेनाशे यहूदी समुदाय के लोगों की वापसी के लिए इजरायल की सरकार ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे यहूदियों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला बताया है। जानते हैं बेनी मेनाशे समुदाय का 2700 साल पुराना इतिहास, यह भारत कैसे पहुंचे और इनकी अब सदियों बाद क्यों वापसी करा रही इजरायली सरकार…
भारत के उत्तरी-पूर्वी राज्यों मणिपुर और मिजोरम में यहूदी समुदाय के लोग सदियों से रह रहे हैं। अब नेतन्याहू सरकार ने इन्हें उत्तरी इजरायल के गैलिली इलाके में बसाने की मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस फैसले को जरूरी बताया और कहा कि इससे इजरायल का उत्तरी इलाका मजबूत होगा। योजना के तहत बेनी मेनाशे समुदाय के 5800 लोगों की 2030 तक इजरायल वापसी कराई जाएगी। यह पूरा प्लान भारत सरकार की सहमति के बाद बना है।
बेनी मेनाशे कौन हैं? – भारत के मणिपुर और मिजोरम में रहने वाले बेनी मेनाशे जनजाति के ये लोग खुद को बाइबिल में बताए गए मनश्शे कबीले का वंशज मानते हैं। यह इजरायल के खोए हुए 10 कबीलों में एक माना जाता है। हालांकि 2005 से पहले यहूदी होने के लेकर दुनियाभर में संशय था, कुछ लोग इन्हें ईसाई भी मानते थे। लेकिन 2005 में तत्कालीन चीफ रब्बी ने इन्हें इजरायल के वंशज के तौर पर मान्यता दे दी। इसके साथ ही इनकी इजरायल में वापसी के रास्ते भी खुल गए।
Home / News / ‘बेनी मेनाशे’ का क्या है 2700 साल पुराना इतिहास, कैसे इजरायल से पहुंचे भारत, क्यों हो रही स्वदेश वापसी?
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