Saturday , April 20 2024 6:12 PM
Home / Spirituality / पूजा में सरसों की बजाय तिल के तेल का दीया क्यों जलाते हैं, जानें फायदे और नियम

पूजा में सरसों की बजाय तिल के तेल का दीया क्यों जलाते हैं, जानें फायदे और नियम


कुंडली में किसी प्रकार के ग्रहदोष के होने से आपको जीवन में सफलता नहीं मिल पाती। कई बार आपकी मेहनत भी खराब चली जाती है, इसलिए आपको जीवन के हर क्षेत्र में तरक्की के लिए तिल के तेल का दीया जरूर जलाना चाहिए। आइए, जानते हैं तिल के तेल का दीया जलाने के और क्या फायदे हैं।
जीवन में कभी-कभी ऐसी स्थिति आती है, जब कुछ भी ठीक नहीं चल रहा होता। आप जो भी फैसले लेते हैं, वो उल्टा पड़ जाता है। आप कितनी भी कोशिश करते हैं, लेकिन सफलता आपसे कोसों दूर भागने लग जाती है। इससे आपका आत्मविश्वास कम होने लगता है और आपका मन किसी भी काम में नहीं लगता। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसा ग्रहों के प्रभाव के कारण भी होता है। जब आपकी कुंडली में विराजमान ग्रह शुभ प्रभाव नहीं दे पाते हैं, तो इसका असर आपके जीवन पर भी पड़ने लगता है। जीवन के हर क्षेत्र में उथल-पुथल शुरू हो जाती है, जिससे मानसिक अंशाति होने लगती है। ऐसे में बहुत जरूरी है कि आप ग्रहों को शांत करने के लिए कुछ उपाय करें। ग्रह दोषों को शांत करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप तिल के तेल का दीपक जलाएं। वास्तुशास्त्र में भी तिल के तेल का दीया जलाने को सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। आइए, जानते हैं तिल के तेल का दीपक जलाते हुए आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत करता है तिल का दीपक – सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है। आपकी कुंडली में अगर सूर्य की स्थिति मजबूत होता है, तो आपका भाग्य आपका साथ देता है और आप अपने कार्यक्षेत्र में सूर्य के समान ही तेजवान और गतिशील बने रहते हैं। इसके अलावा अगर आपके घर में आर्थिक तंगी चल रही है, तो आपको उससे भी मुक्ति मिलती है। तिल के तेल का दीपक जलाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है। साथ ही मानसिक शांति और भावनाओं की स्थिरता के लिए भी तिल के तेल का दीपक जलाया जाता है। इससे कुंडली चंद्रमा ग्रह मजबूत होता है और आपके जीवन पर इसका शुभ प्रभाव पड़ने लगता है। इसके अलावा अगर आपकी राशि पर शनि की साढ़े साती चल रही है, तो उसका प्रभाव भी कम होता है।
तिल के तेल का दीया जलाते समय इन बातों का रखें ध्यान – तिल का दीया जलाते समय याद रखें कि दीए को पहले गंगाजल से धोकर अच्छी तरह से सुखा लें। इसके बाद इसमें रूई की जगह धागे की बत्ती डालकर तेल का तिल डालकर दीया जलाएं।
तिल के दीपक को हमेशा पूर्व दिशा की तरफ ही जलाएं। इसका अर्थ है कि दीपक की बत्ती पूर्व दिशा की तरफ रहनी चाहिए।
आप तिल के तेल का दीपक सुबह या शाम के समय जला सकते हैं। कोशिश करें कि सुबह 4 से 5 बजे के बीच आप तिल के तेल का दीपक जला लें। वहीं, शाम के समय 5 से 8 बजे के बीच तिल के तेल का दीपक जला सकते हैं।
आप पूजा करते समय भी तिल का तेल का दीया जला सकते हैं या फिर सुबह और शाम दीए को जलाकर घर में भी रख सकते हैं।