
पाकिस्तान और अफगानिस्तान में लंबी तनातनी के बाद रिश्ते सुधरते दिख रहे हैं। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में चीन सबसे प्रभावशाली खिलाड़ी के तौर पर उभरा है। बीजिंग ने मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए दोनों पक्षों से अपने संबंधों को फिर से स्थापित करने के लिए कहा है। चीन ने तालिबान को स्पष्ट संदेश दिया है कि उनको आर्थिक और राजनयिक समर्थन चाहिए तो पाकिस्तान विरोधी गुटों पर लगाम लगाना होगा। चीन को अफगान तालिबान पर दबाव बनाने में सफलता भी मिली है। चीन की कोशिशों ने इसलिए भी ध्यान खींचा है क्योंकि हालिया दिनों में काबुल में भारत की पकड़ बढ़ी है। पाक-तालिबान में सुबह के जरिए चीन की भारत का क्षेत्रीय प्रभाव कम करने की कोशिश है।
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) को सुरक्षित करने और अपनी पश्चिमी सीमाओं पर शांति बनाए रखने की कोशिशों के तहत चीन ने अफगान तालिबान पर पाकिस्तान की सुरक्षा चिंताओं को दूर करने का दबाव बनाया है। पाकिस्तान विरोधी गुटों को अफगानिस्तान की धरती पर पनाह मिलने के आरोपों को तालिबान ने हालिया महीनों में नकारा है लेकिन चीन का दबाव पड़ने पर उसके सुर बदल रहे हैं। तालिबान अब अपनी जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ नहीं होने देने का वादा कर रहा है।
बीजिंग में विदेश मंत्रियों की मुलाकात – पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार और अफगानिस्तान विदेश मंत्री अमीर मुत्तकी ने हाल ही में चीन का दौरा किया है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में दोनों की मुलाकात कराई। बीजिंग में हुई ये बैठक तीनों ही देशों के संबंधों के लिहाज से अहम है। बैठक में चीन ने दोनों पक्षों का स्पष्टतौर पर कहा कि उनको संबंधों में सुधार लाना होगा। चीन में बैठक के बाद तालिबान के वरिष्ठ कमांडर सईदउल्लाह सईद की ओर से क्षेत्र में सक्रिय गुटों के लिए चेतावनी भी आ गई।
विश्लेषकों का मानना है कि तालिबान का हालिया रुख अफगानिस्तान में सक्रिय टीटीपी और उसके सहयोगी समूहों के लिए सीधी चेतावनी है। यह चीन के लिहाज से भी अहम है, क्योंकि पाक-अफगान बॉर्डर पर अस्थिरता दक्षिण और पश्चिम एशिया में बीजिंग के अरबों डॉलर के निवेश को खतरे में डालती है। चीन अपने निवेश खासतौर से सीपीईसी प्रोजेक्ट को सुरक्षित करना चाहता है। आर्थिक हितों के लिए पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा को स्थिर करना चीन के लिए महत्वपूर्ण है।
पाकिस्तान के लिए राहत! – पाकिस्तान के लिए चीन का अफगानिस्तान पर दबाव बनाना एक बड़ी कामयाबी है। तालिबान के हालिया बयानों और राजनयिक रूप से फिर से जुड़ने की इच्छा से पता चलता है कि चीन का दबाव काम कर रहा है। इससे पाकिस्तान को अपनी पश्चिम सीमा पर शांति की उम्मीद बंध रही है। पाकिस्तान की चिंता अफगानिस्तान सीमा को लेकर इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि भारत के साथ भी उसके संबंध तनावपूर्ण हैं। पाकिस्तान के लिए दो मोर्चों पर लड़ना भारी चुनौती बन रहा है। ऐसे में चीन के सहारे वह तालिबान को शांत करने में लगा है।
Home / News / पाकिस्तान-तालिबान में सुलह के लिए क्यों बेचैन है चीन? अरबों डॉलर डूबने का डर या भारत को रोकने की कवायद
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