
नई दिल्ली: दुनिया की आर्थिक महाशक्ति अमेरिका अपने कर्जे चुकाने में नाकाम हो जाए तो क्या होगा? अगर वह अपने कर्मचारियों को सैलरी ही ना दे पाए तो क्या होगा? दुनिया भर में इन दिनों यही अनुमान लगाया जा रहा है। शक जताया जा रहा है कि अमेरिका इस हालत के करीब हो सकता है। ये दिन आया तो कुछ नतीजों की कल्पना भी नहीं की जा सकती, क्योंकि अमेरिका ने अभी तक डिफॉल्ट किया नहीं है। फिर भी सवाल उठ रहे हैं कि अमेरिका क्या किसी बड़े संकट में फंसने जा रहा है?
अमेरिका पर कर्ज क्यों – सबसे पहले हम समझें कि किसी देश की इकॉनमी चलती कैसे है। इसे अपने घर की तरह देखें, जहां कमाई है तो खर्च भी। देश की कमाई जहां टैक्स से होती है, वहीं खर्चे सैलरी और सोशल स्कीमों पर होते हैं। ज्यादातर देशों में खर्च ज्यादा है, जबकि कमाई कम, इसलिए इकॉनमी घाटे में चलती है। अगर आपके घर में भी यही हो तो आप क्या करेंगे? कर्ज लेना पड़ेगा।
कर्ज किस हद तक – अमेरिका 31.4 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा का कर्ज नहीं ले सकता। उसने खुद यह सीमा तय कर रखी है। पहले विश्व युद्ध में अमेरिका यह समझ गया कि कर्ज आने वाली पीढ़ियों के लिए बोझ साबित होगा। इसलिए उसने सीमा तय की, जिसे संसद की सहमति के बिना नहीं बढ़ाया जा सकेगा। अमेरिका का कर्ज मौजूदा सीमा तक 19 जनवरी को ही पहुंच गया था। इसके बाद से अकाउंटिंग में इधर-उधर करके काम चलाया जा रहा है। अब पुराने कर्जे अदा करने के लिए नया कर्ज लेना है।
उपाय क्या है – 1960 के बाद से लिमिट को 78 बार तोड़ने की कोशिश की गई। कभी इसे बढ़ा दिया गया, कभी इसे विस्तार दे दिया गया, कभी लिमिट की परिभाषा बदल दी गई। नतीजा ये है कि 1917 से कर्ज की सीमा बढ़ते बढ़ते अब 31.4 लाख करोड़ डॉलर हो गई। फिलहाल सरकार को टैक्स तो मिलता रहेगा, लेकिन इससे काम नहीं चलेगा। मौजूदा जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए और कर्ज लेना होगा।
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