
वाशिंगटन: अमरीका की एक स्वतंत्र संस्था ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया है कि भारत में वर्ष 2014 के बाद नाटकीय रूप से घृणा अपराधों, सामाजिक बहिष्कार और जबरन धर्मांतरण बढ़ गया है जिससे धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों और दलितों को भेदभाव और उत्पीडऩ का सामना करना पड़ रहा है। विदेशों में धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन की निगरानी करने वाले अंतर्राष्ट्रीय धर्मिक स्वतंत्रता के लिए अमरीकी आयोग की जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘कांग्रेस पार्टी और भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारों में अपरिभाषित कानूनी, अप्रभावी आपराधिक न्याय तंत्र और विधिशास्त्र में संगति के अभाव के कारण धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों और दलितों ने भेदभाव और उत्पीडऩ का सामना किया।’’
इस संस्था ने अपनी रिपोर्ट में यह दावा करते हुए अमरीका से कहा कि वह भारत के साथ व्यापार और कूटनीतिक बातचीत के समय मानवाधिकारों को प्रमुखता दें। ‘भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के सामने संवैधानिक और कानूनी चुनौतियां’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘खासतौर पर 2014 के बाद से घृणा अपराधों, सामाजिक बहिष्कारों, हमलों और जबरन धर्मांतरण में नाटकीय रूप से वृद्धि हुई है।’’ इंग्लैंड के बर्मिंघम में इंस्टीट्यूट फार लीडरशिप एंड कम्युनिटी डिवैलपमेंट के निदेशक इक्तिदत करामत चीमा इस रिपोर्ट के लेखक हैं।
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