
कोरोना से जंग के लिए 263 करोड़ रुपए जुटाने वाले पूर्व सैनिक टॉम मूर का 100वां जन्मदिन 30 अप्रैल को है। पूरे देश से लोगों ने उन्हें शुक्रिया कहने के लिए 40 हजार से ज्यादा बर्थडे कार्ड भेजे हैं। इन्हें स्कूल में बनाए गए अस्थायी पोस्ट ऑफिस में रखा गया है। स्थानीय पोस्ट ऑफिस में इन्हें रखने की जगह ही नहीं थी। कॉर्ड्स खोलने के लिए वॉलेंटियर्स भी रखे गए हैं।
पोस्टमास्टर बिल चेंडी ने कहा कि मैंने जिंदगी में ऐसा मंजर पहली बार देखा है। ब्रिटेन के बेडफोर्डशायर में बनाया गया पोस्ट ऑफिस कार्ड से भर चुका है।
वहीं, ब्रिटेन के लंदन में कोरोना से अश्वेत, एशियाई और अल्पसंख्यक जातीय समूह (बीएएमई) में सबसे ज्यादा मौतें भारतीयों की हुई हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। इसके मुताबिक, ब्रिटेन में 17 अप्रैल तक कोरोना से 13,918 लोगों की मौत हुई है, जिसमें बीएएमई के 2,255 लोग हैं। इनमें 418 भारतीय हैं। इसके बाद सबसे ज्यादा 404 मौतें कैरिबियाई और 292 पाकिस्तानी लोगों की हुई है। मौतें और ज्यादा हो सकती हैं क्योंकि अभी केवल अस्पतालों में कोरोना से हुई मौतों के आंकड़े जारी किए गए हैं।
ब्रिटेन: कोरोना से 80 दिन में 2255 गैर ब्रिटिश लोगों की मौत, इनमें सबसे ज्यादा 418 भारतीय
ब्रिटेन में 29 जनवरी को कोरोना का पहला मरीज मिला था। वल्डोमीटर के मुताबिक, ब्रिटेन की आबादी करीब 6.78 करोड़ है। इसमें 13 फीसदी बीएएमई समूह के लोग हैं। ये लोग या इनके पूर्वज दशकों या सैकड़ों साल पहले ब्रिटेन में आकर बस गए थे। बाद में इन्होंने ब्रिटेन की नागरिकता हासिल कर ली थी। ब्रिटेन में भारतीयों की आबादी 18 लाख हैं। स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक ने कहा है कि बीएएमई समूह के लोगों की बहुत अधिक अनुपात में मौतों ने उन्हें चिंता में डाल दिया है। सरकार पूरे मामले पर गंभीर है।
ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन (बीएमए) के प्रमुख डॉ. चांद नागपाल ने कहा कि सरकार को बाहरी अल्पसंख्यक वर्ग पर पूरा ध्यान देना चाहिए। द ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडियन ओरिजिन (बीएपीआईओ) के अध्यक्ष डॉ. रमेश मेहता ने कहा कि वे यह शोध कर रहे हैं कि कैसे बीएएमई समूह पर कोरोना का इतना ज्यादा असर हुआ है। शोध के लिए इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन से अनुबंध किया गया है।
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