
हर इंसान के अंदर कुछ न कुछ करने की तमन्ना होती है। लेकिन, कई बार उम्र की बाधा उन्हें अपनी इच्छा को पूरा करने से रोक देती है। उन्हीं में कई लोग ऐसे भी होते हैं, जो तमाम बाधाओं को तोड़कर इतिहास रचते हैं। ऐसी ही एक भारतीय मूल की महिला ब्रिटेन के ब्राइटन शहर में रहती हैं, जो 85 साल की उम्र में भी लोगों को गुजराती व्यंजन परोस रही हैं। मंजुला पटेल युगांडा से शरणार्थी के रूप में ब्रिटेन आईं और अब वह ब्राइटन के सबसे उम्रदराज शेफ हैं, जो लंबे समय से रेस्टोरेंट चला रही हैं। वह अपने रेस्टोरेंट में आने वाले लोगों को गुजरात से पारंपरिक शाकाहारी व्यंजन सर्व करती हैं। उनके डिश पूरे ब्राइटन में इतने मशहूर हैं कि रोज बड़ी संख्या में लोग उनके रेस्टोरेंट में आते हैं।
गुजरात में हुआ जन्म, पर माता-पिता के साथ पहुंंचीं युगांडा – बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, मंजू पटेल का जन्म गुजरात में हुआ था, पर वह तीन साल की उम्र में ही अपने माता-पिता के साथ युगांडा की राजधानी कंपाला चली गईं। कंपाला में उनके पिता ने एक जनरल स्टोर खोल गुजारा किया। मंजू ने बताया कि उनका बचपन खुशहाल बीता, लेकिन 13 साल की उम्र में पिता की अचानक निधन के बाद सबकुछ बदल गया। रातों-रात, उसकी मां घर की अकेली कमाने वाली बन गई, जिसके बाद मंजू ने परिवार की देखभाल करने में उनकी मदद करने का फैसला किया।
पिता के निधन के बाद शुरू किया टिफिन सर्विस – उन्होंने अपनी मां की मदद से ऑफिस कर्मचारियों के लिए एक दिन में 35 टिफिन बॉक्स बनाया और बेचना शुरू कर दिया। इन टिफिन बॉक्स में भारतीय और युगांडा के लोकप्रिय डिश होते थे। मंजू ने कहा कि पारंपरिक गुजराती व्यंजनों के साथ-साथ, मेरी मां ने अनुशासन के मूल्यों और एक अविश्वसनीय काम की नैतिकता को भी आगे बढ़ाया, जिन मूल्यों को मैं अभी भी कायम रखती हूं। मंजू ने 1964 में एक बिजनेसमैन से शादी की, जिससे उनको दो बेटे हुए। उनका जीवन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था।
तानाशाह ईदी अमीन के कारण छोड़ना पड़ा युगांडा – मंजू के जीवन की शांति 1972 में भंग हुई, जब तानाशाह ईदी अमीन ने युगांडा पर अधिकार कर लिया। उन दिनों युगांडा के 90 फीसदी व्यवसायों पर एशियाई लोगों का अधिकार था और टैक्स का बड़ा हिस्सा भी इन्हीं के मार्फत सरकार को जाता था। लेकिन, ईदी अमीन ने इन लोगों पर युगांडा के संसाधनों का दोहन करने का आरोप लगाते हुए 90 दिनों के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया। इस कारण 10 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हुए। बहुत लोगों को दूसरे देशों में जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
12 डॉलर लेकर परिवार संग ब्रिटेन पहुंचीं मंजू – मंजू, उनके पति अपने दो छोटे-छोटे बच्चों को साथ ब्रिटेन पहुंचे, जहां उनका भाई पहले से रहता था। उस समय मंजू के पति के पास कुल 12 डॉलर की पूंजी थी। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में आने के ठीक तीन दिन बाद, मैंने नौकरी की तलाश शुरू कर दी क्योंकि हमारे पास पैसे नहीं थे। उन्हें लंदन के एक कारखाने में मशीन ऑपरेटर की नौकरी मिली, जहां बिजली के प्लग सॉकेट बनाए जाते थे। उन्होंने 65 साल की उम्र में रिटायर होने तक काम किया।
बच्चों ने मां को गिफ्ट किया खुद का रेस्टोरेंट – मंजू ने हमेशा अपना खुद का रेस्टोरेंट चलाने का सपना देखा था, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति ने इसकी मंजूरी नहीं दी। इसके बावजूद मंजू का खाना बनाने के प्रति प्यार कम नहीं हुआ। काम के बाद हर दिन, वह अपने परिवार के लिए गुजराती व्यंजन बनाती थी जो उसने अपनी मां से सीखा था। इसमें भिंडी और आलू की सब्जी से लेकर ठेपला तक शामिल रहता था। मंजू के बेटे हमेशा अपनी मां के सपने को पूरा करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने पांच साल पहले अपनी मां के 80वें जन्मदिन पर एक रेस्टोरेंट खोलकर सरप्राइज दिया।
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