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9 नहीं 10 दिन तक चलेंगे नवरात्र जानिए, किस दिन रहेगा कौन सी देवी का दिन

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1 अक्टूबर से मां दुर्गा की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र आरंभ हो रहा है, जो 10 अक्टूबर तक चलेगा। इस वर्ष प्रतिपदा तिथि दो दिन तक रहेगी इसलिए नवरात्र 9 नहीं 10 दिन तक चलेंगे। नवरात्र के अतिरिक्त और भी बहुत सारी शुभ तिथियां आ रही हैं। आईए जानें, किस दिन रहेगा कौन सी देवी का दिन

पहला नवरात्र: 1 अक्तूबर, शनिवार को शारदीय (शरद, आश्विन, अस्सु) नवरात्रे प्रारंभ, घट (कलश) स्थापना, श्री दुर्गा पूजा एवं श्री राम लीला कथा-मेला प्रारंभ, नानी-नानी का श्राद्ध, आश्विन शुक्ल पक्ष शुरू, महाराजा अग्रसेन जी की जयंती, मेला माता श्री ज्वालामुखी जी एवं श्री बगलामुखी जी प्रारंभ (हिमाचल), मेला श्री आशापूर्णी जी (पठानकोट)

दूसरा नवरात्र: 2 अक्टूबर, रविवार को चंद्र दर्शन, गांधी जी एवं श्री लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्मदिवस। प्रतिपदा तिथि दो दिन तक बने रहने से आज भी देवी शैलपुत्री का पूजन होगा।

तीसरा नवरात्र: 3 अक्टूबर, सोमवार को नवरात्र की द्वितीया को देवी ब्रह्मचारिणी का पूजन होगा। मुसलमानी महीना मुहर्रम एवं हिजरी सन् 1438 शुरू।

चौथा नवरात्र: 4 अक्टूबर मंगलवार को तृतीया तिथि की देवी दुर्गा के चन्द्रघंटा रूप का पूजन होगा।

पांचवा नवरात्र: 5 अक्टूबर बुधवार को चतुर्थी तिथि की देवी कूष्मांडा स्वरूप का पूजन होगा। श्री उपांङ्ग ललिता पंचमी व्रत, सिद्धि विनायक श्री गणेश चतुर्थी व्रत।

छठा नवरात्र: 6 अक्टूबर वृहस्पतिवार को पंचमी तिथि के भगवान कार्तिकेय की माता स्कंदमाता का पूजन होगा।

सातवां नवरात्र: 7 अक्टूबर शुक्रवार को गुरु (तारा) पूर्व में उदय होगा, आय बील ओली प्रारंभ (जैन)। नारदपुराण में कहा गया है आश्विन शुक्ल षष्ठी को मां कात्यायनी का पूजन करना चाहिए।

आठवां नवरात्र: 8 अक्टूबर शनिवार को श्री सरस्वती देवी जी का आह्वान, सप्तमी तिथि की देवी मां कालरात्रि के पूजन का विधान है।

नौंवा नवरात्र: 9 अक्टूबर रविवार को कन्या पूजन, श्री दुर्गा अष्टमी व्रत, महा अष्टमी, श्री सरस्वती देवी जी का पूजन, मेला माता श्री ज्वालामुखी जी, मेला माता श्री तारा देवी जी, श्री भद्रकाली जी की जयंती।

दसवां नवरात्र : 10 अक्टूबर सोमवार को श्री दुर्गा नवमी, महानवमी, श्री सरस्वती देवी जी के लिए बलिदान एवं विसर्जन, आश्विन (अस्सु,शरद), शारदीय नवरात्रे समाप्त।

11 मंगलवार : 11 अक्टूबर विजयदशमी महापर्व, मेला दशहरा, आयुद्ध पूजा, अपराजिता पूजा, शस्त्र पूजा, रावणदाह (सायं समय), नवरात्रे व्रत का पारणा, स्वामी श्री माध्वाचार्य जी की जयंती, मेला दशहरा (कुल्लू, हिमाचल) प्रारंभ।
बंगाल, कोलकाता व अन्य स्थानों पर जहां काली पूजा और दुर्गा पूजा का विधान है, वहां दसवें दिन देवी दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है।

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