
ईरान का यह कदम अजरबैजान को नाराज कर सकता है क्योंकि उसकी आर्मेनिया से तनातनी किसी से छुपी नहीं है।अजरबैजान को तुर्की और पाकिस्तान से हथियार मिलते रहे हैं। आर्मेनिया और ईरान दोनों ही देशों के अफसरों या नेताओं ने इस हथियार डील पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है।
ईरान और आर्मेनिया ने 500 मिलियन डॉलर के एक बड़े हथियार सौदे पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों देशों के बीच ये डील गुपचुप तरीके से की गई है। ईरान इंटरनेशनल ने सूत्रों के जरिए की गई रिपोर्ट में बताया है कि ईरान आत्मघाती ड्रोन की आपूर्ति आर्मेनिया को करेगा। आर्मेनिया अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है क्योंकि उसकी अजरबैजान से तनातनी हाल के दिनों में काफी बढ़ी है। 1990 के दशक की शुरुआत में सोवियत शासन के पतन के बाद से आर्मेनिया और अजरबैजान दो बड़े युद्ध लड़ चुके हैं। अजरबैजान ने 2020 में अपने क्षेत्र के बड़े हिस्से पर फिर से कब्जा कर लिया। पिछले साल उसकी सेनाओं ने नागोर्नो-कराबाख के क्षेत्र पर भी कब्जा कर लिया, जो लंबे समय से चल रहे संघर्ष का मुख्य केंद्र था। ईरान ने बार-बार चेतावनी दी है कि वह इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सीमाओं में किसी भी बदलाव को बर्दाश्त नहीं करेगा। ऐसे में उसकी कोशिश आर्मेनिया को मजबूती देने की लगती है।
एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के हवाले से ईरान इंटरनेशनल ने बताया है कि हथियारों की ये डील कई हिस्सों में की गई है। इस पर पिछले कुछ महीनों में हस्ताक्षर किए गए हैं। ईरान से जो हथियार आर्मेनिया को मिलेंगे, उनमें विशेष सूची प्राप्त की है जिन्हें ईरान आर्मेनिया की आपूर्ति करने वाला है। इसमें शहीद ड्रोन फैमिली के शहीद 136, शहीद 129, शहीद 197, मोहजर ड्रोन और अरमान एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम शामिल है। ईरान और आर्मेनिया के विदेश और रक्षा मंत्रालयों की ओर से इस पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है।
आर्मेनिया ने बढ़ाया है रक्षा बजट – ईरान-आर्मेनिया हथियार डील में आत्मघाती ड्रोन और वायु रक्षा मिसाइलों की आपूर्ति से आगे भी बहुत कुछ है। इसमें खुफिया सहयोग, घनिष्ठ सैन्य संबंध, प्रशिक्षण और अर्मेनियाई धरती पर ठिकानों की स्थापना भी शामिल है। हाल के महीनों में ईरान से उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल और तकनीकी टीमों की यात्राओं के दौरान हथियारों के सौदों को आगे बढ़ाने सहित दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग पर चर्चा की गई थी। वाशिंगटन इंस्टीट्यूट के हथियार विशेषज्ञ फरजिन नादिमी ने कहा कि ईरान ने आर्मेनिया को पहले भी ड्रोन और कुछ दूसरे हथियार बेटे हैं लेकिन इस पैमाने पर डील पहली बार हुई है। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि इससे अमेरिका खुश होगा।
आर्मेनिया के वित्त मंत्रालय ने बताया कि 2024 में रक्षा खर्च 2020 की तुलना में 81 प्रतिशत बढ़ा है। 2024 में आर्मेनिया का रक्षा बजट करीब 1.4 बिलियन डॉलर था, इसलिए इस सौदे के माध्यम से ईरान को आवंटित की जा रही राशि उस बजट का लगभग एक तिहाई है। आर्मेनिया कर्ज के जरिए इस राशि को चुका सकता है।
ईरान और आर्मेनिया के बीच हथियारों का सौदा दोनों देशों से आगे बढ़कर ईरान-अजरबैजान संबंधों को प्रभावित करेगा, खासकर तब जब ईरान ने एक जातीय तुर्की भाषी को राष्ट्रपति चुना है। एक्सपर्ट का मानना है कि अजरबैजान इस सौदे से बहुत नाराज होगा। वहीं ईरान इसलिए भी अजरबैजान के लिए अपना गुस्सा दिखाना चाहता है, क्योंकि अजरबैजान इजरायली हथियारों का एक बड़ा ग्राहक है।
Home / News / ईरान भारत के दोस्त आर्मेनिया को देगा किलर शहीद ड्रोन, पाकिस्तान और तुर्की के करीबी अजरबैजान को मिलेगा जवाब
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