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भारत पर भारी-भरकम टैरिफ लगाकर ट्रंप घर में ही घिरे… पक्ष से विपक्ष तक ने बताया रणनीतिक आपदा, चीन को क्यों बख्शा?

यूएस फॉरेन अफेयर्स कमेटी डेमोक्रेट्स के ट्वीट में कहा गया है कि “अगर डोनाल्ड ट्रंप रूस से तेल खरीदने वाले सभी देशों के खिलाफ सेकेंडरी टैरिफ लगाते तो फिर भी बात समझ में सकती थी, लेकिन सिर्फ भारत पर सेकेंडरी टैरिफ लगाने का फैसला करने के भ्रामक नीतिगत परिणाम सामने आए हैं।
डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने भारत पर 50 प्रतिशत का भारी भरकम टैरिफ लगाया है। ट्रंप के इस फैसले ने भारत और अमेरिका के रिश्तों में दरार दी है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पिछले 25 सालों से दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली के लिए दोनों देशों की तरफ से मेहनत की गई है, उसे ट्रंप ने बर्बाद कर दिया है। ट्रंप की अमेरिका के भीतर ही तीखी आलोचना हो रही है। आलोचकों का कहना है कि यह फैसला न सिर्फ अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि वाशिंगटन और नई दिल्ली के रिश्तों को भी गहरी चोट देगा।
हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के डेमोक्रेट्स ने इसे “अमेरिकियों को चोट पहुंचाने और भारत-अमेरिका संबंधों को बर्बाद करने वाला फैसला” बताया है। यूएस फॉरेन अफेयर्स कमेटी डेमोक्रेट्स की तरफ से इस मुद्दे पर कई ट्वीट किए गये हैं। जिनमें आरोप लगाया गया है, कि ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेल खरीदने पर सिर्फ भारत को निशाना बनाया है, जबकि चीन और कई अन्य देश कहीं ज्यादा मात्रा में रूसी ऊर्जा आयात कर रहे हैं, लेकिन उन पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं लगाई गई। कमेटी ने अपने बयान में तीखा तंज कसते हुए लिखा, “ये फैसला ऐसा लग रहा है कि ये फैसला यूक्रेन को लेकर है ही नहीं।”
डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका में तीखी आलोचना – यूएस फॉरेन अफेयर्स कमेटी डेमोक्रेट्स के ट्वीट में कहा गया है कि “अगर डोनाल्ड ट्रंप रूस से तेल खरीदने वाले सभी देशों के खिलाफ सेकेंडरी टैरिफ लगाते तो फिर भी बात समझ में सकती थी, लेकिन सिर्फ भारत पर सेकेंडरी टैरिफ लगाने का फैसला करने के भ्रामक नीतिगत परिणाम सामने आए हैं। चीन, जो रूसी ऊर्जा का सबसे बड़ा आयातक है, अभी भी रियायती कीमतों पर तेल खरीद रहा है और अब तक उसे ऐसी सजा से बचा लिया गया है।” यह पोस्ट बुधवार को एक्स पर शेयर की गई थी और संयोग से उसी दिन भारत से अमेरिका में आयात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू हुआ था।