
घर के वास्तु का शुभाशुभ प्रभाव ग्रहदशा के साथ व्यक्ति के भाग्य पर पड़ता है। अगर ग्रहदशा सही हो और मकान वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार बना हो, तो व्यक्ति के जीवन में अनावश्यक कष्ट, तनाव, विघ्न, बाधाऐं उपस्थित नहीं होते हैं। लेकिन अगर मकान में वास्तुदोष हो और मकान में निवास करने वालों की ग्रहदशा भी अच्छी न चल रही हो, तो ऐसी स्थिति में वहां पर निवास करने वाले लोगों को कई गुना कष्ट प्राप्त होता है।
जब उत्तर दिशा खुली हो, उत्तर की तरफ नीचा हो, पूर्व-उत्तर ढलानदार हो, उत्तर व पूर्व में द्वार हो, दक्षिण सबसे उंचा होकर पूर्व व उत्तर की ओर पानी निकले तो अवश्य ही लक्ष्मी जी का प्रवेश उस घर में होता है। विस्तार से जानें घर के लिए वास्तु के नियम।
वास्तु के नियमों के अनुसार जब पानी के स्थान पर आग चली जाए, तो घर में तूफान मच जाता है या जब आग के स्थान पर पानी चला जाए तो इन दोनों हालात में मकानमालिक के उपर दूसरी मुसीबतों के साथ गरीबी हमला कर देती है।
दक्षिण दीवार के साथ बेसमेंट, टैंक या कुआ बन जाए और उत्तरी दीवार का फर्श सबसे उंचा होकर कइ मंजिला बन जाए, तो इस वास्तु दोष के कारण आपदाऐं, संकट ओर बीमारियों का सामना करना पड़ता है।
रसोईघर में चूल्हा उत्तरी दीवार पर हो, नल दक्षिणी दीवार पर हो, दक्षिण-पश्चिम खुला हो तो दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है।
जिस मकान का वायव्य कोण यानि उत्तर-पश्चिम दिशा का भाग सही हो और उत्तरी भाग खुला हो, ऐसे मकान में निवास करने वाले लोग अच्छी ग्रहदशा आने पर बहुत ही अमीर और भाग्यशाली हो जाते हैं।
जिस मकान का उत्तरी भाग सबसे उंचा हो और दक्षिणी भाग सबसे नीचा हो तो धनवान व्यक्ति भी धीरे-धीरे दरिद्र होकर अभाव में जीवन जीने लगते हैं।
दक्षिण-पश्चिम दिशा में बेसमेंट बनाने से यह दिशा मकान में सबसे नीची हो जाती है, ऐसा करने से धन का निरन्तर अभाव बना रहता है।
उत्तर दिशा खुली हो, उत्तर-पूर्व यानि ईशान कोण में गहरा टैंक अथवा पानी की व्यवस्था हो, दक्षिण दिशा में कई मंजिला मकान हो जिससे वह दिशा सबसे उंची हो जाए, तो घर में लक्ष्मी का अंबार लग जाता है।
मकान परिसर के उत्तरी-पूर्वी भाग में सीढ़ी हो और यह भाग ज्यादा उंचाई लिए हो, द्वार भी गलत दिशा में बना हो तो अशुभ ग्रहदशा चलने पर परिवार के लोग असाध्य रोगों से ग्रस्त हो जाते हैं, जिसका निवारण वास्तु के साथ ग्रहदशा का उपचार करने पर ही सम्भव होता है।
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