
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रक्षा समझौता किसी एक देश पर हमले को दोनों पर हमला मानने के लिए प्रतिबद्ध करता है। अमेरिकी एक्सपर्ट का कहना है कि यह समझौता भारत के लिए सुरक्षा समीकरणों को बदलने वाला है।
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए ऐतिहासिक रक्षा समझौते को विश्लेषक भारत के लिए खतरा बता रहे हैं। उनका कहना है कि यह रक्षा समझौता न केवल इस्लामाबाद को मजबूत करेगा बल्कि नई दिल्ली के सुरक्षा समीकरणों को भी बदल देगा। अमेरिकी भू-राजनीतिक विश्लेषक और यूरेशिया ग्रुप के चेयरमैन इयान ब्रेमर ने इंडिया टुडे के साथ एक इंटरव्यू में यह बात कही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान के साथ हाल के तनावों को देखते हुए यह समझौता ‘भारत के जीवन को बदलने वाला है। इसमें कोई संदेह नहीं है।’
ब्रेमर ने कहा कि ‘अगर आप भारत हैं और पाकिस्तान के साथ आपकी सीमा सुरक्षा का गंभीर मुद्दा चल रहा है, तो इस बात की पूरी संभावना है कि हम एक और सैन्य टकराव देखेंगे।’ रक्षा समझौते की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने आगे कहा कि ‘सऊदी अरब पाकिस्तान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे में अब अगर टकराव होता है तो अगर मैं भारत हूं तो इसे मेरी गणना में शामिल करना होगा।’
सऊदी अरब को पाकिस्तान की परमाणु छतरी – पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच बुधवार को हुए रणनीतिक पारस्परिक रक्षा समझौते में कहा गया है कि किसी भी देश पर हमला दोनों के खिलाफ आक्रमण माना जाएगा। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने यह साफ कर दिया है कि यह समझौता परमाणु क्षमताओं तक विस्तृत है। उन्होंने एक इंटरव्यू में स्वीकार किया कि रक्षा समझौते के तहत परमाणु कार्यक्रम सऊदी को उपलब्ध कराया जा सकता है। आसिफ ने कहा, ‘हमारे पास जो कुछ है, जो क्षमताएं हैं वे इस समझौते के तहत उपलब्ध कराई जाएंगी।’
ब्रेमर ने बताया कि यह समझौता रियाद और इस्लामाबाद के संबंधों को मजबूत करने के साथ ही पाकिस्तान के लिए आत्मविश्वास का नया स्तर जोड़ता है। उन्होंने कहा कि चीन पाकिस्तान का प्रमुख सहयोगी बना हुआ है। यह स्थिति जल्द बदलने वाली नहीं है। यहीं से उन्हें अपना अधिकांश सैन्य समर्थन मिल रहा है। यहीं से उन्हें साझा खुफिया जानकारी मिल रही है।
अमेरिका से मजबूत होते रिश्ते – उन्होंने इस बात की तरफ भी ध्यान दिलाया कि पाकिस्तान नए रिश्ते भी बना रहा है। हाल ही में उसके अमेरिका के साथ रिश्ते फिर से मजबूत हुए हैं। क्रिप्टोकरेंसी में निवेश और राष्ट्रपति ट्रंप के परिवार समेत दूसरे निवेशों ने पाकिस्तान-अमेरिका संबंधों में नया आयाम गढ़ा है, जो इस्लामाबाद को मजबूत महसूस कराता है।
पाकिस्तानी परमाणु कार्यक्रम में सऊदी फंडिंग – इसके साथ ही पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के लिए सऊदी अरब का समर्थन अब कोई रहस्य नहीं है। सऊदी अरब कई सालों से पाकिस्तान और उसके परमाणु कार्यक्रम को फंडिंग देता रहा है। पाकिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी खुद इसका खुलासा कर चुके हैं। यह खुला रहस्य रहा है कि सऊदी अरब पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को रियाद का आपातकालीन परमाणु कार्यक्रम मानता था।
Home / News / पाकिस्तान-सऊदी डिफेंस डील भारत के लिए क्यों है बड़ा खतरा? अमेरिकी एक्सपर्ट ने बताई वजह, परमाणु बम तक इसमें शामिल
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