Monday , February 16 2026 4:27 AM
Home / Uncategorized / कभी रूस में भगवद गीता को बैन करने के लिए चला था मुकदमा, पीएम मोदी का पुतिन को यह गिफ्ट क्यों खास है?

कभी रूस में भगवद गीता को बैन करने के लिए चला था मुकदमा, पीएम मोदी का पुतिन को यह गिफ्ट क्यों खास है?


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को रूसी भाषा में अनुदित गीता की एक प्रति भेंट की। पीएम मोदी ने X पोस्ट पर इसकी जानकारी साझा करते हुए कहा कि गीता की शिक्षाएं दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रेरणा देती हैं। लेकिन यह जानकर हैरानी होगी कि पीएम मोदी ने जिस भगवद गीता की प्रति पुतिन को भेंट की, उसके एक संस्करण लेकर रूस में मुकदमा चल चुका है। उस समय गीता को रूस में प्रतिबंधित करने की मांग उठी थी। लेकिन रूस की अदालत ने हिंदू धर्मग्रंथ भगवद गीता के एक संस्करण पर प्रतिबंध लगाने की मांग को खारिज कर दिया था।
‘गीता’ को ‘उग्रवादी’ घोषित करने की मांग हुई थी – रूस में गीता पर बैन लगाने की मांग वाला यह मामला 2011 का है। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक साइबेरिया के शहर टॉम्स्क के अभियोजकों ने गीता के एक संस्करण को ‘उग्रवादी’ घोषित करने की मांग की थी। ऐसा होने पर ‘गीता’ को हिटलर की Mein Kampf जैसी श्रेणी में डाल दिया जाता। रूसी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जांच का केंद्र धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि उसकी व्याख्या थी।
‘Bhagvad Gita As It Is’ नाम वाले गीता के इस संस्करण का ‘हरे कृष्णा मूवमेंट’ वितरण करता था। ‘हरे कृष्णा मूवमेंट’ की ओर से वकील अलेक्जेंडर शखोव ने पक्ष रखा था। विवादित टीका एसी भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने लिखी है, जो इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस (ISKCON) के संस्थापक हैं। रूस में हरे कृष्णा समुदाय का मानना है कि यह मामला रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च द्वारा उनकी गतिविधियों को सीमित करने की कोशिश का परिणाम था।
भारत ने जताई थी कड़ी प्रतिक्रिया – यह मुकदमा जून 2011 में शुरू हुआ था और 19 दिसंबर को निर्णय होना था, लेकिन मानवाधिकार ओम्बड्समैन के अनुरोध पर इसे 28 दिसंबर 2011 तक टाल दिया गया। हालांकि, फैसला सुनाए जाने के समय न तो केंद्रीय ओम्बड्समैन व्लादिमीर लुकिन और न ही टॉम्स्क की ओम्बड्समैन नेल्ली क्रेचेटोवा अदालत में मौजूद थीं। उस दौरान भारत के तत्कालीन विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा ने रूस के राजदूत अलेक्जेंडर कडाकिन से इस मामले पर कड़ी आपत्ति जताई थी। कृष्णा ने कहा था कि रूस में हिंदू अधिकारों के संभावित उल्लंघन को लेकर भारतीयों में काफी नाराजगी है। भगवद गीता हिंदुओं के सबसे लोकप्रिय और पूजनीय ग्रंथों में से एक है, जिसमें भगवान कृष्ण और अर्जुन के बीच संवाद का विवरण है।